प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेक इन इंडिया योजना व चीन की एकल बालक नीति छात्रों की किताबों में पहुंच गई है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने इन्हें ओपन टेक्सट बेस्ड असेसमेंट (ओटीबीए) के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया है। आर्थिक विकास में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की भूमिका को भी सामग्री में शामिल किया गया है।
बोर्ड ने कक्षा नौवीं व 11वीं के लिए ओटीबीए ऑनलाइन टेक्सट मैटेरियल को स्कूलों को भेज दिया है। 2017, मार्च में होने वाली नौवीं और 11वीं की परीक्षाओं में छात्रों से इसी के आधार पर सवाल पूछे जाएंगे। सीबीएसई ने वर्ष 2014 में ओटीबीए सिस्टम शुरू किया था। हर साल बोर्ड की ओर से इसके लिए सामग्री तैयार कर छात्रों से सवाल पूछे जाते हैं।
बोर्ड ने स्कूलों को सूचना दी है कि वह अपने यहां नौवीं में होने वाले समेटिव एसेसमेंट-2 (लिखित परीक्षा) व 11वीं के लिए होने वाली वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दें। इसके लिए काफी पहले ही बोर्ड ने अध्ययन सामग्री भेज दी है। नौवीं में ओटीबीए के लिए अंग्रेजी, हिंदी, सोशल साइंस, साइंस व गणित की अध्ययन सामग्री जारी की गई है। वहीं, 11वीं के तीन विषयों अर्थशास्त्र, भूगोल व जीव विज्ञान की अध्ययन सामग्री दी गई है। इसके शिक्षकों को गाइड लाइंस भी भेजी गई है।
11वीं के अर्थशास्त्र का हिस्सा
11वीं के अर्थशास्त्र में भारत सरकार की बहुराष्ट्रीय व राष्ट्रीय कंपनियों को भारत में ही उत्पादन करने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए मेक इन इंडिया सामग्री को शामिल किया गया है। चीन की एकल बालक नीति, इस नीति के समापन कारण व प्रभाव को भी हिस्सा बनाया गया है। भूगोल में जैविक कृषि, मनुष्यों का प्रकृतिकरण व प्रकृति का मानवीकरण के संबंध में जानकारी को शामिल किया गया है।
नौवीं में महाराष्ट्र का सूखा
नौवीं के विषय सामाजिक विज्ञान में वर्षा, भारतीय अर्थव्यवस्था के संचालन का एक महत्वपूर्ण कारक व महाराष्ट्र में सूखे के संबंध में जानकारी को भी शामिल किया गया है। ओटीबीए व्यवस्था के तहत बोर्ड की ओर से आर्टिकल, केस स्टडी, मैप व पिक्चर की शक्ल में पहले ही अध्ययन सामग्री उपलब्ध करा दी जाती है, ताकि छात्र तैयारी कर लें।