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सैनिक परिवार की बेटी, देश और जेएनयू को जोड़ने का देगी संदेश : गीता 

Mon, 11 Sep 2017 12:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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जेएनयू छात्रसंघ चुनाव के व‌िजेता - फोटो : अमर उजाला
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जेएनयू कैंपस में 9 फरवरी 2016 को लोगों ने वीडियो में भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे सुने होंगे, लेकिन इसी कैंपस से मैं देश-दुनिया को भारत समेत जेएनयू को तोड़ने नहीं, बल्कि जोड़ने का संदेश दूंगी।
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मेरे पिता भारत सेना में हैं, जिनके लिए देश सर्वोपरि है। इसी प्रकार हम जेएनयू के छात्रों के मन में भी देशभक्ति का जज्बा बरकरार है। मैं जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष होने के नाते कैंपस के प्रति आम लोगों की गलत धारणा को दूर करूंगी। यह कहना है जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष गीता कुमारी का।

एमफिल इतिहास की पढ़ाई कर रही गीता ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि लेफ्ट का मतलब हमेशा देश विरोधी होना नही है। यही सोच बदलने की जरूरत है। मैं आइसा के पूर्व नेता चंद्रशेखर को अपना आदर्श मानती हूं, जो कि हमेशा महिलाओं के अधिकारों की बात करते थे।
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अध्यक्ष गीता कुमारी - फोटो : अमर उजाला
​हरियाणा के पानीपत में जन्मीं और समालखा (हरियाणा व करनाल के बीच कस्बा) में पली बढ़ी गीता एक आम मध्यम वर्गीय परिवार की बेटी है। गीता के पिता नरेंद्र सिंह भारतीय सेना में सुबेदार हैं और मां सुशीला देवी गृहिणी।

मेरे मम्मी-पापा भी पढ़ना चाहते थे, हालांकि हरियाणा में उच्च शिक्षा के उस वक्त बेहतर अवसर नहीं थे। इसीलिए मैं आइसा के माध्यम से हरियाणा में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान चलाउंगी और महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने की बात भी रखुंगी।

हालांकि उससे पहले कैंपस में हॉस्टल की दिक्कत समेत एमफिल व पीएचडी में सीट कटौती को लेकर अभियान चलाना है, ताकि आम परिवारों के छात्रों के लिए यहां उच्च शिक्षा के दरवाजे हमेशा खुले रहें।
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योगी जी, एंटी रोमियो से नहीं होगी महिलाओं की सुरक्षा दुरुस्त: उपाध्यक्ष सिमोन

- फोटो : अमर उजाला
यूपी के बांदा की मूल निवासी और असम में पली बढ़ी सिमोन जोया खान कैंपस की दिक्कतों को दूर करने के बाद यूपी में महिलाओं के अधिकारों के हनन की लड़ाई लड़ेंगी। सिमोन कहती हैं कि योगी आदित्यनाथ ने महिलाओं के अधिकारों व रेप मामलों में सुधार के लिए एंटी रोमियो मुहिम शुरू कर दी, लेकिन योगी जी एंटी रोमियो से यूपी में महिलाओं की सुरक्षा दुरुस्त नहीं होगी।

बल्कि घर से ऐसा माहौल पैदा करना होगा, जिसमें बेटी को बेटे की तर्ज पर समान अधिकार व इज्जत दी जाए। जब घर में ऐसा माहौल होगा तो बेटियां अपनी दिक्कत बिना डरे अपने पिता या भाई से कह सकती हैं। और जब बेटा ऐसा माहौल देखेगा तो बाहर महिलाओं की इज्जत करेगा।

वहीं, कैंपस में हॉस्टल के नाम पर कुलपति द्वारा झुठे आश्वासन की बजाय निर्माण का काम शुरू करवाने के लिए एमफिल व पीएचडी प्रोग्राम में सीट कटौती की किल्लत को दूर करना है।

रोहित वेमूला को इंसाफ संग नजीब अहमद को तलाशने की लड़ाई चलेगी (महासचिव)
छात्रसंघ के महासचिव और हैदराबाद निवासी दुग्गिराला श्रीकृष्ण कहते हैं कि हमें एबीवीपी से कोई दिक्कत नहीं है। यह तो सिर्फ विचारधाराओं की लड़ाई है। हम मानते हैं कि लोकतंत्र में सबको अपनी बात कहने का अधिकार है। मैं कैंपस के अन्य दिक्कतों को दूर करने के साथ रोहित वेमूला को इंसाफ दिलाने की लड़ाई शुरू करूंगा। जबकि नजीब अहमद को तलाशने में फिर एक नया अभियान, ताकि फिर कोई छात्र कैंपस से इस प्रकार गायब न हो।
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