जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में 2019 से ऑनलाइन डिग्री मिलेगी। स्पेशल सेंटर फॉर ई-लर्निंग में अगले सत्र से सर्टिफिकेट, स्किल डेवलेपमेंट व ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई भी होगी। स्कूल ऑफ संस्कृत और इडिक स्ट्डीज में छात्रों को एमए संस्कृत, सर्टिफिकेट ऑफ प्रफिशन्सी इन कंप्यूटेंशनल लिंगग्विस्टिक्स और सर्टिफिकेट ऑफ प्रफिशन्सी इन पाली में ऑनलाइन कोर्स शुरू होंगे। एमफिल व पीएचडी में केंद्र सरकार की आरक्षण नीति के तहत दाखिले होंगे।
जेएनयू कैंपस में शुक्रवार को 147वीं अकादमिक काउंसिल की बैठक कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम और स्कूल ऑफ संस्कृत में तीन ऑनलाइन प्रोग्राम के प्रस्ताव पास हो गए। बैठक में विभिन्न विषयों में ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम शुरू करने पर सहमति बनी, ताकि छात्रों को गुणवत्ता युक्त अच्छी शिक्षा मुहैया करवाई जा सके। जेएनयू विशेषज्ञ विभिन्न विषयों में ऑनलाइन कोर्स तैयार करेंगे।
बैठक में शिक्षकों व कर्मियों की भर्ती और प्रमोशन में यूजीसी रेगलुेशन-2018 के नियम लागू होंगे। इसके अलावा अब एमफिल और पीएचडी में कोई दूसरे की रिसर्च को अपना नाम नहीं दे सकेगा। यदि कोई ऐसा करता है, तो फिर यूजीसी रेगुलेशन-2018 के साहित्यिक चोरी नियम के तहत कार्रवाई होगी। बैठक में जेएनयू यूजीसी रेगुलेशन-2018 को लागू करने के लिए जेएनयू अध्यादेश की जगह नया अध्यादेश लाने पर भी सहमति बनी। इसके लिए कमेटी गठित कर दी गई है, जोकि विभिन्न स्कूल व सेंटरों के प्रमुख से सुझाव लेगी।
छात्रसंघ काउंसिल का सदस्य नहीं : प्रबंधन
अकादमिक काउंसिल की बैठक से जेएनयू छात्रसंघ को बाहर रखने के आरोप पर विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि छात्रसंघ काउंसिल का सदस्य नहीं है, इसलिए उसे आने की अनुमति नहीं मिली। इसके अलावा पिछली अकादमिक काउंसिल की बैठक में अनुशासनहीनता के चलते पूर्व छात्रसंघ को प्रतिबंधित किया गया था।
कक्षाओं का किया बहिष्कार
बैठक में छात्रसंघ को जाने की अनुमति न मिलने के चलते छात्रसंघ ने शुक्रवार को कक्षाओं का बहिष्कार किया। इस दौरान वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं व शिक्षकों ने कक्षाएं नहीं ली। वहीं, एबीवीपी ने ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा से दाखिले के विरोध में प्रदर्शन किया।