राजस्थान के छोटे से गांव भजेड़ा निवासी रामजल ने राजस्थान से ही ओपन एजुकेशन से हिंदी-साहित्य, राजनीति शास्त्र व इतिहास विषयों के साथ स्नातक की। वह साइंस के छात्र भी रहे और बीएससी प्रथम वर्ष की भी पढ़ाई की, लेकिन फिर शादी हो गई। इसके बाद पढ़ाई में बाधा उत्पन्न हो गई।
तीन बच्चों के पिता अपनी संतान के हीरो बन गए हैं। बहनों की शादी के लिए उन्होंने मजदूरी तक की है। पिता चाहते थे कि वह कुछ पढ़ाई करें। जयपुर बीए का फॉर्म भरने आने पर यहां सिक्योरिटी गार्ड की भर्ती का पता चला। भर्ती होने के बाद प्रशिक्षण के लिए उन्हें गुरुग्राम भेजा गया। सबसे पहले दिल्ली मेट्रो में सिक्योरिटी गार्ड रहे। साल 2014 में जेएनयू आए।
मन में ठाना और कर दिखाया
रामजल कहते हैं कि गार्ड की नौकरी के साथ पढ़ाई करना आसान नहीं था, लेकिन मन में ठाना हुआ था। इसलिए उन्होंने साबित कर दिया कि पढ़ाई कभी भी और किसी भी उम्र में की जा सकती है। ड्यूटी के दौरान पढ़ाई करने के कारण डांट भी खाई। कुछ प्रोफेसर और विद्यार्थियों से उन्हें हमेशा सहयोग मिलता रहा। रशिया के विषय में समाचार पत्रों में पढ़ने पर उसके विषय में जानने की इच्छा हुई। वहां का साहित्य अच्छा लगा तो उस विषय को चुन लिया।