कविता कला की इतिहासकार हैं, जिन्हें इंफोसिस पुरस्कार उनके मुगल, राजपूत और दक्कन कला पर अद्वितीय कार्य करने और ऐतिहासिक कार्यक्रमों और म्यूजियम की भूमिका और उनके महत्व पर बहुत ही बारीकी से लिखे हुए लेख के लिए मिला है।
कविता ने बताया कि अवार्ड मिलना उनके लिए एक सरप्राइज था क्योंकि उन्होंने मेरा अपडेटेड सीवी भी नहीं मांगा था और न ही एक बार भी बताया था कि मेरे नाम के बारे में सोचा जा रहा है। मुझे एक फोन आया जिसमें मुझे बधाई दी गई और कहा गया कि जब तक अधिकारिक घोषणा नहीं हो जाती तब तक मैं ये बात किसी को न बताऊं।
कविता ने आगे कहा, अब जबकि मैं पुरस्कार जीत गई हूं मुझे मेरे वाइस चांसलर की तरफ से एक भी संदेश नहीं आया है, जबकि उन्हें मैंने निजी तौर पर लिखकर इस बारे में बताया था। यहां तक कि यह जानकारी भी जेएनयू की वेबसाइट पर भी नहीं डाली गई है। इस विषय में वीसी, रजिस्ट्रार और रेक्टर-1 से किसी भी तरह की कोई बात नहीं हो सकी है।