जेएनयू यौन शोषण मामले में गिरफ्तार प्रोफेसर अतुल जौहरी को अदालत ने मंगलवार शाम जमानत दे दी। जौहरी को गिरफ्तारी के बाद पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया था। थाना वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस ने पीएचडी की आठ छात्राओं की शिकायत पर उनके खिलाफ छेड़छाड़ की आठ एफआईआर दर्ज की थी।
पटियाला हाउस अदालत की ड्यूटी मजिस्ट्रेट रीतू सिंह ने जौहरी को हर मामले में 30 हजार के निजी मुचलके व एक जमानती पर जमानत प्रदान की है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि वह जमानत के दौरान शिकायतकर्ता या गवाह से न मिलेंगे और न ही उन्हें प्रभावित करने की कोशिश करेंगे।
साथ ही वह किसी भी पीड़िता से नहीं मिलेंगे। न ही साक्ष्यों से छेड़छाड़ करेंगे। शर्तों का उल्लंघन करने पर जमानत रद्द कर दी जाएगी। वहीं, पुलिस ने कोर्ट से कहा कि जौहरी से पूछताछ पूरी हो चुकी है। उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाए। हालांकि, पुलिस ने जमानत का जोरदार विरोध नहीं किया।
प्रदर्शन करते जेएनयू छात्र
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता आर के वाधवा ने जिरह करते हुए कहा कि पुलिस ने सभी एफआईआर में छेड़छाड़ की धाराएं लगाई हैं। लेकिन किसी भी एफआईआर में छेड़छाड़ का मामला नहीं बनता। पुलिस ने 19 मार्च को एफआईआर दर्ज की हैं।
सभी आरोप 2013 व 2014 में लगाए गए हैं। दरअसल, सारे मामले फर्जी हैं और बदनियती से दर्ज करवाए गए हैं। दरअसल, उनके मुवक्किल ने आरोप लगाने वाली लड़कियों को उपस्थिति संबंधी यूजीसी के निर्देशों का पालन करने के लिए 22 फरवरी 2018 को ई मेल भेजे थे।
जिसमें कहा गया था कि छात्र उपस्थिति पूरी करें अन्यथा उनकी पीएचडी पूरी होने में देरी होगी। बचाव पक्ष ने कहा कि जौहरी डीयू से पीएचडी हैं। 2004 से यहां पढ़ा रहे हैं। दर्जनों छात्रों ने उनके मार्ग दर्शन में पीएचडी पूरी की है।
अगर उन्हें जेल भेज दिया गया तो उनका कॅरियर बर्बाद हो जाएगा। वह कैंपस में ही रहते हैं। उनकी पत्नी भी प्रोफेसर हैं। उनके बच्चे की दसवीं की परीक्षा है। इन तथ्यों के मद्देनजर उन्हें जमानत प्रदान की जानी चाहिए।