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डूसू चुनाव: युवाओं को जोड़ने के लिए उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना जरूरी 

Wed, 13 Sep 2017 10:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नर्ई दिल्ली
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डूसू चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में कांग्रेस व भाजपा की छात्र ईकाई एनएसयूआई व एबीवीपी ने भले ही दो-दो सीटों पर विजय प्राप्त कर ली लेकिन इन नतीजों में दूरगामी परिणाम के संकेत मिले है। किसी भी देश की दशा व दिशा वहां के  युवा तय करते हैं। इन परिणामों से स्पष्ट हो गया कि युवाओं का ज्यादा देर तक प्रलोभन में नहीं रखा जा सकता।
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भाजपा को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि हर बार मोदी लहर का वास्ता देकर युवाओं को आकर्षित नहीं किया जा सकता, बल्कि उनकी उम्मीदों पर खरा भी उतरना होगा। 

केंद्र सरकार से छात्र संघ के चुनाव भी प्रभावित होते हैं। जब तक केंद्र में कांग्रेस की सरकार रही छात्र संघ पर एनएसयूआई के प्रत्याशी बढ़त लेते रहे है। पिछले लोकसभा चुनावों में युवाओं ने मोदी पर विश्वास जताया और पूरे देश में सोशल मीडिया पर युवा इस अभियान में चले और मोदी के नेतृत्व पर आस्था जताई।
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यही कारण है कि छात्र संघ के चुनावों में चार वर्ष से एबीवीपी का कब्जा रहा। मोदी लहर को विजय का मापदंड बनाकर चुनाव लड़ा जाता रहा और हर बार एनएसयूआई का सूपड़ा साफ होता रहा। प्रदेश भाजपा हो या उसकी छात्र ईकाई, किसी ने भी इन वर्षो में छात्रों के हित में कोई ठोस काम नहीं किया। यही कारण है कि युवाओं ने सबक सिखाने के लिए ज्यादा वोट नहीं किया, बल्कि नोटा का ज्यादा प्रयोग किया। वहीं एनएसयूआई इसी का फायदा उठाते हुए बाजी मार गई।
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प्रमुख दो सीटों पर जीत से कांग्रेस को ऊर्जा मिली है

डूसू चुनाव - फोटो : अमर उजाला
इन चुनावों में प्रमुख दो सीटों पर जीत से कांग्रेस को ऊर्जा मिली है और युवाओं के वोट से कांग्रेस अपने भविष्य को तलाशने में लग गई। कांग्रेस नेता इस बात से भी खुश है कि कल तक कांग्रेस राहुल गांधी पर चुटकले इत्यादि सबसे ज्यादा युवाओं ने ही बनाए थे लेकिन अब उनका झुकाव कांग्रेस की ओर है।

स्पष्ट है कि कांग्रेस को लगने लगा है कि एमसीडी चुनाव, बवाना उपचुनाव में जिस प्रकार उनका वोट प्रतिशत बढ़ा और उसके बाद अब छात्र संघ में भी वोट प्रतिशत बढ़ने से कांग्रेस को भविष्य उज्जवल नजर आ रहा है। यही कारण है कि इन नतीजों के बाद प्रदेश कांग्रेस नेता अजय माकन काफी उत्साहित नजर आए।

आम आदमी पार्टी भी दिल्ली में लगातार जीतने के बाद अति उत्साहित नजर आई और उनका काम धरातल पर चला गया। लगातार कई राज्यों व दिल्ली में हार के बाद जिस प्रकार मुख्यमंत्री केजरीवाल व पूरी सरकार मैदान पर उतर आई उसका परिणाम बवाना उपचुनाव में जीत के रूप में सामने आया था। उधर, प्रदेश भाजपा ने दो सीटें जीतने के बावजूद मौन धारण कर लिया। हालांकि प्रदेश स्तर पर इन चुनावों को जीतने के लिए पूरी कमर कसी गई थी। वहीं कोई नेता शाम तक मीडिया के सामने नहीं आया।
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