भारत में उच्च शिक्षा के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा की प्रणाली बेहद खराब है। दो-दो प्रवेश परीक्षा में पास होने के लिए छात्र कोचिंग का सहारा लेते हैं। लिहाजा, तनाव बढ़ने से आत्महत्या के मामले भी बढ़ रहे हैं। आईआईटी समेत अन्य प्रवेश परीक्षा प्रणाली को अमेरिका की तर्ज पर एक परीक्षा में बदलने की जरूरत है। जहां सिर्फ एक परीक्षा से छात्र की प्रतिभा परख ली जाती है। आईआईटी जिसे रिजेक्ट करता है, अमेरिका उसे अपना लेता है। यह कहना है वैज्ञानिक व प्रोफेसर सीएनआर राव का।
आईआईटी दिल्ली में दीक्षांत समारोह में भाग लेने पहुंचे प्रो. राव ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि आईआईटी में दाखिला लेने के लिए छात्र कोचिंग का सहारा लेते हैं। वहां तनाव बढ़ने से ही आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि इसमें कोचिंग सेंटर का दोष नहीं है, बल्कि प्रवेश परीक्षा प्रणाली में कमी है। हमें शिक्षा को ज्ञान पर फोकस करना होगा।
विदेशी फैकल्टी लाना गलत
प्रो. राव के मुताबिक, दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में शामिल होने के लिए सरकार आईआईटी में विदेशी फैकल्टी को लाने जा रही है, जो गलत है। भारत में एक से बढ़कर एक वैज्ञानिक व विशेषज्ञ हैं। मैं आईआईटी में हूं, क्योंकि मेड इन इंडिया हूं। लेकिन कैलिफोर्निया, येल, एमआईटी या बर्कली से कोई विशेषज्ञ आईआईटी क्यों आना चाहेगा? उन्होंने कहा कि अगर विदेशी फैकल्टी भारत आती है तो वे यहां के विशेषज्ञों के बॉस बन जाएंगे। हमें अपनी गुणवत्ता को बढ़ाने पर फोकस करना चाहिए।
सरकार के दखल से ब्रांड पर धक्का
प्रो. राव ने कहा कि सरकार का दखल बढ़ने से आईआईटी अब एक ब्रांड नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग कॉलेज बन रहे हैं। यहां छात्रों की संख्या की बजाय गुणवता बढ़ाने पर जोर देना होगा। स्टार्टअप एक अच्छा आइडिया है, लेकिन फैकल्टी को आजादी भी मिले, ताकि वे कैमिकल, नैनो साइंस, सैंसर आदि रिसर्च में गुणवत्ता पर काम कर सकें, क्योंकि हम सैंसर के लिए जापान पर निर्भर हैं।