मुक्त और दूरस्थ शिक्षा में नए कीर्तिमान बनाने के बाद अब इग्नू डिजिटल क्षेत्र में छात्रों को बेहतर शिक्षा मुहैया करवाने जा रहा है। दूरस्थ शिक्षा के तहत छात्रों को तकनीक और प्रौद्योगिकी के माध्यम से ऐसे पाठ्यक्रम तैयार करने होंगे, ताकि छात्रों को डिग्री के साथ रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हो सकें।
क्योंकि दूरस्थ शिक्षा के चलते छात्रों का अन्य विश्वविद्यालयों में पढने वाले की तर्ज पर शिक्षा के क्षेत्र में पूरी जानकारियां नहीं मिल पाती हैं। यह बात मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उच्च शिक्षा डॉ. महेंद्र नाथ पांडे ने इग्नू के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए कही।
मैदान गढ़ी स्थित इग्नू मुख्यालय में बृहस्पतिवार को आयोजित 30वें दीक्षांत समारोह में पांडे ने लाइव वेबकॉस्ट के माध्यम से देशभर के 56 रिजनल सेंटर के छात्रों से भी सीधे बात की। कार्यक्रम में 2 लाख 38 हजार छात्रों को डिग्री, डिप्लोमा व सर्टिफिकेट देकर भी सम्मानित किया गया। उन्होंने इग्नू प्रबंधन से छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ स्किल डेवलपमेंट व कैंपस प्लेसमेंट में ओर अधिक काम करने का आग्रह किया।
इग्नू के छात्रों के लिए स्टडी वेब ऑफ एक्टिव प्रोगाम
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पांडे ने कहा कि इग्नू के छात्रों को भी मंत्रालय के ऑनलाइन मूक कोर्स स्वयं (स्टडी वेब ऑफ एक्टिव-लर्निंग फॉर यंग एंस्पाइरिंग माइंड) प्लेटफार्म के माध्यम से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल पढ़ाई करने का मौका मिलेगा। ऑनलाइन पाठ्यक्रम के चलते घर बैठे शिक्षा लेने वाले छात्रों को इसका सबसे अधिक लाभ होगा। अब इग्नू की परीक्षा केंद्रीय विद्यालय संगठन के स्कूलों में भी आयोजित की जाएगी, जिसके लिए समझौता हो चुका है।
इससे पहले इग्नू के कुलपति प्रो. रवीन्द्र कुमार ने वार्षिक रिपोर्ट के साथ विश्वविद्यालय में चल रहे कोर्स व पाठ्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जुलाई 2016 से दाखिला आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन करने से छात्रों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। वहीं, जनवरी 2017 में एक लाख 53 हजार 454 छात्रों ने ऑनलाइन आवेदन भरा था।
ऑनलाइन आवेदन में छात्रों को ऑनलाइन ही गलितयों को सुधारने का मौका मिलता है, जिससे उन्हें बार-बार रिजनल सेंटर आने की जरूरत नहीं होती है। इसकेअलावा एक वर्ष से अधिक अवधि वाले प्रोग्राम जैसे बीए, बीकॉम, बीएससी, बीटीएस आदि में छात्रों को ऑनलाइन पंजीकरण के लिए क्लाउड आधारित आवेदन पत्र भी तैयार किया गया है।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम अवार्ड के साथ दस हजार कैश
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कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ठ प्रदर्शन करने वाले 120 छात्रों को पीएचडी, दस को एमफिल तो 66 छात्रों को गोल्ड मैडल का अवार्ड देकर भी सम्मानित किया गया। इसके अलावा सोशल साइंस वर्ग में एमए की परीक्षा में सबसे अधिक नंबर लेने वाले छात्रों को प्रो. जीराम रेड्डी मेमोरियल गोल्ड मैडल, एमसीए प्रोग्राम में महिला प्रतिभागियों को सीईएससीए के तहत 25 हजार रुपये का कैश अवार्ड, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम अवार्ड के तहत बैचलर इन सोशल वर्क में गोल्ड मैडल के छात्रों को दस हजार रुपये कैश, मदर टेरेसा मेमोरियल अवार्ड के तहत सोशल वर्क में एमए में गोल्ड मैडल पाने वाले छात्रों को दस हजार कैश, प्रो. ग्रोवर अवार्ड में एमकॉम में दिव्यांग छात्रों को पांच हजार रुपये तो बीकॉम छात्रों को तीन हजार रुपये का कैश पुरस्कार भी मिला।