शिक्षा सत्र शुरू हुए ढाई माह बीत चुका है, लेकिन अभी तक मेवात के स्कूलों में बच्चों के लिए किताबें नहीं पहुंची हैं। जबकि दूसरे जिलों में किताबें पहुंच चुकी हैं।
ऐसे में यहां पढ़ाई कैसे होगी, इस पर सवाल खड़ा हो रहा है। बता दें कि हरियाणा सरकार हर वर्ष सरकारी स्कूलों में पहली से 8वीं कक्षा तक पढने वाले बच्चों को निशुल्क किताबें, स्टेशनरी, बैग, वर्दी, जूते आदि मुहैया कराती है।
मेवात में बहुत कम मौके ऐसे रहे हैं जब किताबें यहां समय पर पहुंचकर बच्चों को वितरित की गई हों। आधा सत्र बीत जाने पर ही मेवात में बच्चों को निशुल्क किताबों का लाभ नहीं मिल पाता है।
अपनी पढ़ाई बाधित होते देख बच्चे दुकानों से किताबें खरीद लेते हैं। वहीं गरीब बच्चों को किताबों के आने का इंतजार करना पड़ता है। पढ़ाई के दो माह पूरे हो जाने के बाद स्कूलों की छुट्टियां इन दिनों चल रही हैं और अध्यापकों ने बच्चों को छुट्टियों के लिए गृहकार्य दिया हुआ है। जो बिना किताबों के इन बच्चों की परेशानी बढ़ा रहा है।
इतना ही नहीं पाठ्यक्रम को लेकर भी अध्यापकों में असमंजस है। बिना किताबों के पिछले दो माह में उन्होंने बच्चों को नए पाठ्यक्रम के बजाय पुरानी किताबों से ही बच्चों को पढ़ाया गया है।
अधिवक्ता नूरुद्दीन नूर, समाजसेवी आसिफ अली, खलील अहमद, राधेश्याम, जयराम छपेडा, सतबीर मेंबर का कहना है कि सरकार को बच्चों की पढ़ाई से कोई सरोकार नहीं हैं। स्कूलों में सत्र की शुरूआत के ढाई माह बाद तक भी किताबें नहीं पहुंचना बड़ी बात है।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी वजीरचंद मजोका का कहना है कि ज्यादातर जिलों में किताबें पहुंच चुकी हैं। अब मेवात की बारी है। उमीद है कि जल्दी किताबें आ जाएंगी और स्कूल खुलते ही किताबों को स्कूलों में पहुंचा दिया जाएगा।