हाईकोर्ट ने कहा समाचारों में स्पष्ट है कि सीबीएसई ने कुल अंकों के जोड़ में गलतियां की है और बाद में सत्यापन के बाद उसे सही किया गया। ऐसे में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में भी त्रुटियां हो सकती हैं।
न्यायमूर्ति संजीव सचदेव व न्यायमूर्ति एके चावला की खंडपीठ ने समाचार पत्रों में छपी खबरों का हवाला देते हुए कहा जिन छात्रों ने अपने बोर्ड की परीक्षा के अंकों का सत्यापन किया, उनके अंकों में 35-45 अंकों की बढ़ोतरी हुई है। कहा जब अंकों के जोड़ में गलतियों है तो मूल्यांकन में कितनी होंगी।
खंडपीठ ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को निर्देश दिया कि पुन: मूल्यांकन नीति को खत्म करने वाली गवर्निंग बॉडी व परीक्षा कमेटी के निर्णय की प्रति पेश करें। अदालत ने सीबीएसई को कक्षा 12 की अपनी मार्किंग स्कीम को भी पेश करने का निर्देश दिया है, जिसके खिलाफ छात्रों ने याचिका दायर की है।
अदालत ने मामले की सुनवाई 21 जून तय की है। खंडपीठ सऊदी अरब के छात्र सहित राजधानी के अन्य छात्रों की याचिका पर सुनवाई कर रही है। इन छात्रों ने सीबीएसई की पुन: मूल्यांकन न करने संबंधी नीति को चुनौती देते हुए अपने पेपरों का पुन: मूल्यांकन करने का निर्देश देने का आग्रह किया है।
उनका तर्क है कि उन्हें अपेक्षा से कम अंक प्रदान किए गए है। याची ने उड़ीसा हाईकोर्ट के निर्णय का भी हवाला देते हुए तर्क रखा है कि सीबीएसई ने वहां पुन: मूल्यांकन करने की सुविधा का तर्क दिया है।