याचिका पर जिरह करते हुए अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा कि बोर्ड बारहवीं की परीक्षा तो अप्रैल में करवा रहा है, लेकिन दसवीं की जुलाई में करवाएगा, जिसकी तारीख अभी तय नहीं है। इससे दसवीं की परीक्षा देने वाले छात्रों का समय बर्बाद होगा, जिसका उनकी पढ़ाई पर असर पड़ेगा।
याचिका में कहा गया है कि पेपर लीक में सरकार व बोर्ड की लापरवाही जिम्मेदार है। अर्थशास्त्र व गणित की परीक्षा से 28 लाख छात्रों का हित प्रभावित हुआ है, लेकिन इन छात्रों की क्षतिपूर्ति के लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।
पेश याचिका में कहा गया है कि इस मामले में सरकारी अधिकारियों को बचाने के लिए पुलिस सही दिशा में जांच नहीं कर रही है, इसलिए इस मामले की जांच कोर्ट की निगरानी में करवाई जाए।
अगर यह संभव नहीं है तो अर्थशास्त्र की तरह ही गणित की परीक्षा भी अप्रैल में करवाई जाए। दोबारा परीक्षा में छात्रों को अंक देने में रियायत की जाए और दिव्यांग छात्रों का विशेष ध्यान रखा जाए।