‘मनोहर’ सरकार ने स्कूली बैग के बोझ तले दबे बचपन को बड़ी राहत दी है। सरकार के नए फैसले से अब सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को शनिवार के दिन स्कूल बैग लेकर नहीं जाना पड़ेगा।
इस दिन विद्यार्थी स्कूल में सांस्कृतिक एवं खेल गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। इसे ज्वॉयफुल एक्टिविटी डे का नाम दिया गया है। इस योजना की शुरूआत बाल दिवस (14 नवंबर) के मौके पर की जाएगी।
बता दें प्रदेश में पहली, दूसरी व तीसरी क्लास में बच्चों को 4 टेक्स्ट बुक्स, चौथी व पांचवीं में 5, छठवीं में 17, सातवीं में 15 और कक्षा 8 में 16 लानी पड़तीं हैं। स्कूल बैग के इस बोझ को कम करते हुए प्रदेश सरकार ने महीने के हर शनिवार को बैग फ्री कर दिया है और इस दिन को एक्टिविटी डे के रूप में मनाने फैसला लिया है।
सरकार का यह फैसला स्कूल बैग के बोझ तले दबे बचपन को राहत तो देगा, साथ ही इससे नौनिहालों का खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से सर्वांगीण विकास होगा। शनिवार को छोड़ बाकी दिन पढ़ाई पर केंद्रित रहेंगे। इसकी जानकारी सभी जिलों में शिक्षा अधिकारियों को दे दी गई है।
बस्ते के बोझ से बच्चों पर शारीरिक व मानसिक कुप्रभाव पड़ता है। किताबों के दबाव में मानसिक विकास संभव ही नहीं है। खेलकूद का मौका नहीं मिलता, जिसमें शारीरिक व मानसिक विकास बाधित हो जाता है। -सुशील कण्वा, पूर्व जिला प्रधान, हसला
ज्वॉयफुल एक्टिविटी डे की शुरूआत जिलास्तर पर राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बल्लभगढ़ और खंड स्तर पर सेक्टर 7 स्थित स्कूल से की जाएगी। इस मौके पर बच्चों के लिए मनोरंजक गतिविधियां कराई जाएंगी। वास्तव में बच्चों पर बस्ते का बोझ किसी भी स्तर से बेहतर नहीं है। यह बच्चों के समग्र विकास में सबसे बड़ा बाधक है। बस्ते के बोझ को कम करने का प्रदेश सरकार का निर्णय स्वागतयोग्य है। -अनीता शर्मा, खंड शिक्षा अधिकारी बल्लभगढ़।