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अब मशीन बनाने के साथ नैतिक मूल्यों का पाठ भी पढ़ेंगे शिक्षक, इसके बाद ही होगी नियुक्ति

Mon, 14 May 2018 10:24 AM IST
सीमा शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
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फाइल फोटो
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अब एमटेक और पीएचडी करने वाले तकनीकी शिक्षक कॉलेजों में जाकर नहीं पढ़ा सकेंगे, बल्कि प्रोवेशन पीरियड में एक साल की अनिवार्य ट्रेनिंग करनी पड़ेगी। इस ट्रेनिंग के बाद परीक्षा पास करने के बाद ही कॉलेज में नियुक्ति होगी।

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देशभर के इंजीनियरिंग, फार्मेसी व मैनेजमेंट कॉलेजों में शिक्षकों के लिए एआईसीटीई की पहली तकनीकी शिक्षक ट्रेनिंग पॉलिसी तैयार है। खास बात यह है कि अब शिक्षकों को पढ़ायी में छात्रों को मशीन नहीं, बल्कि मानवीय व नैतिक मूल्य, समाज से जोडने की कला, उद्योग की बारीकियों व मांग से निपुण करवाने की भी ट्रेनिंग दी जाएगी।

केंद्र सरकार ने तकनीकी शिक्षा में सुधार के मकसद से पहली तकनीकी शिक्षक ट्रेनिंग पॉलिसी तैयार करवायी है। अमर उजाला के पास मौजूद इस पॉलिसी की ड्रॉफ्ट रिपोर्ट के मुताबिक, आईआईएससी बंगलूरू के एडवाइजर प्रो.एचपी खिंचा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी ने फाइनल किया है।
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यह पॉलिसी में गुणवत्ता, मानक, कमियों व सर्वे रिपोर्ट को आधार बनाकर तैयार की गयी है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय, यूजीसी व एआईसीटीई बेहतर ट्रेनिंग के लिए विशेषज्ञों के लिए आर्थिक मदद करेगा।

महत्वपूर्ण सुझाव व बिंदू
- एआईसीटीई हर साल 30 हजार शिक्षकों की भर्ती करता है। ट्रेनिंग के बाद समय-समय पर नॉलेज अपडेट करें। लगातर मॉनिटरिंग के अलावा प्रिंट व इलेक्ट्रिनिक मेटिरियल उपलब्ध करवाएं। हर साल तकनीकी विषय पर विशेषज्ञों का एक कोर्स करवाएं।  
- टीचर लर्निंग प्रोसेस में पढ़ाने की साइकोलॉजी, शैक्षणिक तकनीक से रूबरू कराना, समझ विकसित करना, अगले दिन की एडवांस तैयार, क्लास में छात्रों से बातचीत का तरीका सिखाया जाएगा।  
- रिसर्च एंड डेवलेपमेंट के बारे में ज्ञान बढाना, बड़े संस्थानों में ही रिसर्च पर काम करना। थ्यिरी नालेज को प्रैक्टिकल या रिसर्च में प्रयोग की जानकारी मिलेगी। 
- शिक्षक-छात्र के बीच बेहतर संवाद, रिश्ते की क्वालिटी डेवलप करने के मंत्र देना।  
- अस्सिटेंट प्रोफेसर और प्रोफेसर स्तर के शिक्षकों (फैकल्टी )को मेंटर शिक्षक से ट्रेनिंग के बाद उन जानकारियों को पहले सेमेस्टर के कोर्स में शामिल करना होगा, ताकि पता चलें कि कितना समझा और फायदा हुआ।  
- फैकल्टी को एक विषय में एक लैब कोर्स भी अपने मेंटर शिक्षक के अधीन करना होगा।

भारतीय इंजीनियर सिर्फ एक मशीन, दुनियादारी से दूर : सर्वे
पिछले दिनों सर्वे में सामने आया था कि भारतीय इंजीनियर के ज्ञान को दुनिया सलाम करती है, जिनके पास करोड़ो के पैकेज हैं। हालांकि वे सिर्फ मशीन है, जोकि मानवीय व नैतिक मूल्यों, धर्म-समाज के अलावा दुनियादारी से भी दूर हैं। उन्हें कपड़े पहनने का सलीका तक नहीं आता है। इसी के चलते अब शिक्षकों को ट्रेनिंग में इसकी जानकारी मिलेगी, ताकि वे कक्षा में जाकर छात्रों की इन कमियों को दूर करते हुए  उन्हें अप-टू-डेट करें।

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