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डीयूः चंद सीटों के लिए मिले हजारों आवेदन, कॉलेजों की मेरिट लिस्ट नहीं हुई जारी

Thu, 28 Jul 2016 10:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली यूनिवर्सिटी
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दिल्ली विश्वविद्यालय में पांचवीं कटऑफ के बाद खाली सीटों को लेकर आए हजारों आवेदन और छात्रों के अंकों की सही गणना नहीं हो सकने के कारण कई कॉलेज देर रात तक मेरिट लिस्ट जारी नहीं कर सके।
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मेरिट लिस्ट जारी नहीं हो पाने से अब आज, बृहस्पतिवार से शुरू होने वाले दाखिलों पर भी संशय के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि कॉलेजों को कहना है कि रात भर बैठकर मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी, जिससे कि तय समयानुसार (बृहस्पतिवार) दाखिले शुरू हो सकें। देर रात तक मेरिट लिस्ट जारी न होने के कारण छात्रों के सामने भी असमंजस की स्थिति है।

चंद सीटों पर आए हजारों आवेदन का अंदाजा आप इन आंकड़ों से लगा सकते हैं कि हंसराज कॉलेज में 50 सीटों के लिए 84000 आवेदन आए, यानी हर एक सीट के लिए 1680 उम्मीदवारों ने अप्लाई किया है। इसी तरह रामजस की 100 सीटों के लिए 57000 आवेदन आए, दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज की 25 सीटों के लिए 37000 आवेदन आए वहीं लेडी श्रीराम कॉलेज की 6 सीटों के लिए 1800 आवेदन आए हैं।
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बची सीटों पर दाखिले करने के लिए मेरिट लिस्ट से दाखिले होने थे

दिल्ली विश्वविद्यालय
डीयू में पांचवीं व अंतिम कटऑफ के बाद बची सीटों पर दाखिले करने के लिए मेरिट लिस्ट से दाखिले होने थे। इस दाखिला प्रक्रिया के लिए कॉलेजों ने शनिवार को बची सीटों की जानकारी जारी कर दी थी। जिसके आधार पर छात्रों को आवेदन करने के लिए तीन दिए गए।

तीन दिन में कॉलेजों को बंपर आवेदन प्राप्त हुए। इन आवेदनों के आधार पर कॉलेजों को बुधवार शाम चार बजे तक मेरिट लिस्ट जारी करनी थी लेकिन, देर रात तक महज गिने-चुने कॉलेज ही अपनी मेरिट लिस्ट जारी कर सके।

जिनमें मिरांडा हाउस व कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडी शामिल हैं। जबकि हंसराज कॉलेज ने अपनी वेबसाइट पर यह सूचना जारी की है कि मेरिट लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया अभी जारी है। आर्यभट्ट कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. मनोज सिन्हा ने बताया कि अभी मेरिट लिस्ट तैयार नहीं हो सकी है।
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प्रिंसिपल दबी जुबान में कह रहे हैं कि कटऑफ सिस्टम ही ठीक था

दिल्ली विश्वविद्यालय
देर रात तक कुछ कोर्सेज की लिस्ट जारी कर दी जाएगी। जिससे कि किसी तरह से दाखिले शुरू हो सकें। उन्होंने बताया कि छात्रों ने आवेदन के समय अंकों को गलत तरीके से भर दिया है।

मसलन यदि 95 फीसदी किसी छात्र ने अपनी कटऑफ बताई है तो उसने अर्थशास्त्र के साथ शारीरिक शिक्षा के अंकों को भी जोड़ दिया है। वहीं अंकों की कटौती के बिना ही अंक भर दिए हैं। इससे कॉलेजों को सही डाटा नहीं मिल पाया है।

वहीं अब कई प्रिंसिपल दबी जुबान में कह रहे हैं कि कटऑफ सिस्टम ही ठीक था। इस बार काफी असमंजस की स्थिति बन गई है। डीयू के एक अधिकारी का कहना है कि यह समस्या केवल एक दो कॉलेजों की नहीं है बल्कि ज्यादातर कॉलेजों को मैरिट तैयार करने में समस्या हुई।

दाखिला रद्द कराने से कॉलेजों की बढ़ेगी परेशानी
वहीं कई कॉलेज चिंतित हैं कि यदि मेरिट के दाखिलों में भी छात्र अगर दाखिले रद्द कराते हैं तो परेशानी बढ़ेगी। इस तरह से फिर सीटें खाली होंगी और लगातार दाखिले करने पड़ेंगे। इससे कक्षाएं शुरू करने में स्थिरता भी नहीं आ पा रही है।
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