दिल्ली विश्वविद्यालय के तदर्थ शिक्षकों ने राहत के लिए राष्ट्रपति से गुहार लगाई है। शिक्षकों ने एक ज्ञापन के जरिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मांग की है कि शिक्षक जहां कार्यरत हैं, उन्हें वहीं स्थायी नियुक्ति दी जाए।
राष्ट्रपति के डीयू विजिटर होने के कारण ही शिक्षकों की ओर से उनका दरवाजा खटखटाया गया है। शिक्षकों का कहना है कि स्थायी नियुक्ति प्रक्रिया के समान ही उनकी नियुक्ति प्रक्रिया होती है।
निर्धारित योग्यता भी स्थायी शिक्षकों की तरह ही होती है। लिहाजा डीयू में रिक्त पड़े शिक्षक पदों पर उनकी नियुक्ति की जाए। राजधानी कॉलेज के एक तदर्थ शिक्षक ने बताया कि ज्ञापन के साथ ही लगभग 2000 से अधिक तदर्थ शिक्षकों के हस्ताक्षर भी सम्मति के रूप में सौंपे गए हैं।
पहले भी हुआ ऐसा
शिक्षकों का कहना है कि जहां शिक्षक पढ़ा रहे हैं, यदि वहां उन्हें स्थायी किया जाता है तो ऐसा पहली बार नहीं होगा। वर्ष 1978-79 में लगभग 400 शिक्षकों को स्थायी कर दिया गया था। उस समय 400 शिक्षकों की ही जरूरत थी। लेकिन अब रिक्त पदों की संख्या 4500 पहुंच गई है।
प्रधानमंत्री को भी सौंपा है मांगपत्र
राष्ट्रपति को दिए गए ज्ञापन के साथ ही मांगपत्र को प्रधानमंत्री, मानव संसाधन विकास मंत्री, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग व डीयू कुलपति को भी दिया गया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि उन्हें प्रत्येक चार माह में नियुक्ति पाने के लिए प्रशासन का मोहताज रहना पड़ता है। ऐसे में राष्ट्रपति से अपील की गई है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करें और एक अध्यादेश के जरिये सभी तदर्थ शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से स्थायी करवाया जाए।