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डीयू: प्रोफेसर बनने में आड़े आ रही बाधा

Thu, 09 Feb 2017 12:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली यूनिवर्सिटी
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यूजीसी के सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के बैकलॉग पदों को भरने के लिए लिखे गए पत्र ने डीयू के शिक्षकों के समक्ष परेशानी खड़ी कर दी है। इस पत्र में कहा गया है कि एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर बनने के लिए उम्मीदवार के निर्देशन में कम से कम सफल पीचएडी शोध कार्य संपन्न होना चाहिए।
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यदि किसी ने अपने तहत एक शोधार्थी को पीएचडी नहीं करवाई है, तो वह एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के पदों के लिए आवेदन नहीं कर सकता। यदि उम्मीदवार ने आवेदन कर भी दिया, तो उसे इंटरव्यू कॉल नहीं मिलेगा।

डीयू अकादमिक काउंसिल के सदस्य प्रो. हंसराज सुमन ने सभी यूनिवर्सिटी में आवेदनकर्ताओं के लिए एक पीएचडी शोधार्थी कराना अनिवार्य किए जाने की निंदा की है। उनका कहना है कि इस अनिवार्यता के कारण खासकर आरक्षित वर्गों के योग्य उम्मीदवार एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के पदों पर आ नहीं पाएंगे।
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उन्होंने सवाल खड़ा किया कि कॉलेजों में पढ़ा रहे कितने शिक्षक अपने तहत पीएचडी शोध कार्य करवा रहे हैं। इनमें आरक्षित वर्गों और पिछड़ी जातियों के कितने शिक्षक शोध निदेशक हैं। ऐसे में यूनिवर्सिटी में एससी-एसटी-ओबीसी कोटे के उम्मीदवारों के लिए बैकलॉग रिक्तियों को निकालने का कोई मतलब नहीं है। जब वे अपनी योग्यता ही पूरी नहीं करेंगे तो प्रोफेसर कैसे बनेंगे।

उनका कहना है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों में 4500 पद लंबे समय से खाली हैं। हाल ही में संसदीय समिति ने 4500 पदों को बैकलॉग बताया है। इस मामले पर उन्होंने यूजीसी, एमएचआरडी और संसदीय समिति के चेयरमैन को पत्र लिखकर मांग की है कि आरक्षित वर्ग के पदों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाया जाए और जल्द से जल्द पीएचडी की अनिवार्य शर्त को समाप्त किया जाए, ताकि खाली पदों को भरा जा सके।
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