दिल्ली विश्वविद्यालय का देशबंधु कॉलेज बीते डेढ़ माह से बिना प्रिंसिपल के चल रहा है। कॉलेज में प्रिंसिपल के नहीं होने के कारण सभी काम अटके हुए हैं। वर्ष 2017 में स्थायी प्रिंसिपल पद के लिए साक्षात्कार हुआ था।
प्रिंसिपल की स्थायी नियुक्ति के लिए कॉलेज ने तीन शिक्षकों का पैनल बनाकर डीयू प्रशासन को भेज दिया था। इस पैनल में वर्तमान में तत्कालीन ओएसडी (प्रिंसिपल) का नाम भी शामिल था। उसके बाद अपेक्स कमेटी हुई।
कमेटी ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया। डीयू के नियमानुसार यदि किसी व्यक्ति को उस पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जो तो उसे पद पर बने रहने का अधिकार नहीं होता।
अयोग्य घोषित होने के बाद कॉलेज प्रिंसिपल ने अपना त्याग पत्र गवर्निंग बॉडी को भेज दिया। लेकिन अब तक गवर्निंग बॉडी ने उनका त्याग पत्र स्वीकार नहीं किया। ऐसे में वह अब तक प्रिंसिपल हैं लेकिन वह कॉलेज नहीं आ रहे हैं और सब कुछ बिना प्रिंसिपल के चल रहा है।
दिल्ली विश्वविद्यालय विद्वत परिषद(एकेडेमिक काउंसिल) सदस्य प्रो हंसराज ने बताया कि तत्कालीन प्रिंसिपल (ओएसडी)ने कॉलेज के चेयरमैन को अपना त्याग पत्र भेज दिया, मगर उनका त्याग पत्र आज तक स्वीकार नहीं हुआ।
कॉलेज शिक्षकों का कहना है कि त्याग पत्र देने के बाद से उन्होंने कॉलेज आना बंद कर दिया है। प्रो हंसराज ने कहा कि कॉलेज में शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों को हमेशा काम पड़ता है लेकिन प्रिंसिपल नहीं है। उन्होंने तत्काल स्थायी-अस्थायी प्रिंसिपल की नियुक्ति के लिए डीयू कुलपति प्रो योगेश कुमार त्यागी को पत्र लिखा है।
उन्होंने मांग की है कि कॉलेज में कई ऐसे शिक्षक हैं जो प्रिंसिपल पद की पूर्ण योग्यता रखते हैं। उनमें से ही किसी वरिष्ठ शिक्षक को प्रिंसिपल का कार्यभार सौंपा जाए।