दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) अध्यक्ष पद का क्या होगा, इसका फैसला अब कोर्ट के रुख से तय होगा। दरअसल अंकिव की फर्जी डिग्री मामला कोर्ट में चल रहा है। इस मामले की सुनवाई 20 नवंबर को होनी है।
लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अनुसार नतीजे आने के दो महीने बाद अध्यक्ष सीट खाली होती है तो डूसू उपाध्यक्ष कार्यवाहक अध्यक्ष बनता है। डूसू के जानकार बताते हैं कि अभी चूंकि मामला कोर्ट में है, लिहाजा उपाध्यक्ष को कार्यवाहक अध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा।
वहीं डीयू में दावा किया जा रहा है कि डूसू के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब विवाद के चलते दो महीने बाद अध्यक्ष ने अपने पद से इस्तीफा दिया हो। पूरे घटनाक्रम के बाद अंकिव ने सोशल मीडिया पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि वह अपने ऊपर लगे बेबुनियाद आरोपों को जल्द ही गलत साबित करेंगे। उन्होंने डीयू प्रशासन से भी आग्रह किया है कि वह उन पर लगे आरोपों की जल्द जांच कर इस विवाद को समाप्त करें।