दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग प्रमुख और नॉन कॉलेजिएट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इतिहास विभाग पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने के आरोप लगाए जा रहे हैं तो नॉन कॉलेजिएट में नियमों को ताक पर रखकर शिक्षकों की श्रेणी बदलने के आरोप लग रहे हैं।
इनके विरोध में विद्वत परिषद सदस्य आज विश्वविद्यालय के गेट पर भूख हड़ताल करेंगे। विद्वत परिषद की सदस्य डॉ लता ने आरोप लगाया कि लंबे समय से इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष नियमों को तोड़कर व्यक्तिगत लाभ के लिए अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं।
इतिहास विभाग ने एमफिल और पीएचडी की लिखित परीक्षा केवल अंग्रेजी माध्यम में कराकर लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, जबकि कक्षा में 80 प्रतिशत छात्र हिंदी माध्यम के हैं। इसके साथ ही तदर्थ पैनल में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के बाहर से पीएचडी धारकों को पैनल श्रेणी 1 व 2 से हटा दिया है। विभाग ईसी रेजोल्यूशन 2007 को नहीं मान रहा है। कॉलेज स्तर पर तदर्थ नियुक्ति के लिए सेलेक्शन कमेटी होती हैं, जिसमें कॉलेज के सदस्य शिक्षकों की भर्ती करते हैं।