दिल्ली विश्वविद्यालय के विभागों में कार्यरत प्रोफेसरों के अलावा जल्द ही कॉलेज शिक्षक भी एमफिल के लिए गाइड करते दिखाई देंगे। डीयू ने यूजीसी के निर्देशों व शिक्षकों से प्राप्त सुझावों के आधार पर एमफिल व पीएचडी के लिए नए नियम तैयार किए हैं।
इन नियमों के मुताबिक, अब दो साल शिक्षण का अनुभव रखने वाले कॉलेज शिक्षक भी एमफिल के लिए गाइड बन सकेंगे। इस तरह रिसर्च में शिक्षकों की भागीदारी बढ़ जाएगी व रिसर्च को बढ़ावा मिल सकेगा।
अनुमान है कि नए नियम से कॉलेज के चार हजार शिक्षक रिसर्च गाइड बन सकेंगे। नियमों में बदलाव डीयू के पूर्व कुलपति प्रो. दिनेश सिंह के कार्यकाल में हुआ था।
डीयू के एकेडमिक काउंसिल सदस्य डॉ. आर एन दुबे ने बताया कि अब तक नियम था कि जिन शिक्षकों के पास पीएचडी के साथ तीन साल शिक्षण का अनुभव है, व शिक्षक किसी एक प्रमुख रिसर्च प्रोजेक्ट से जुड़ा हो वह ही पीएचडी करा सकता था।
अब पीएचडी स्तर पर तीन साल की अनुभव सीमा को घटा कर दो साल कर दिया गया है। अनुभव के लिए जरूरी मुख्य रिसर्च प्रोजेक्ट की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है।
दुबे ने बताया कि उन्होंने शिक्षक संगठन एनडीटीएफ के सदस्य के तौर पर कुलपति के समक्ष मामले को उठाया था। उन्होंने अगस्त में हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक में भी नियमों में बदलाव की मांग की थी।