एकेटीयू की ओर से करीब दो माह पहले सभी कॉलेजों में हेल्प डेस्क चालू करके छात्रों की समस्याओं को दूर करने के निर्देश दिए गए थे, मगर नोएडा-ग्रेटर नोएडा के करीब 70 फीसदी कॉलेजों ने यूनिवर्सिटी के निर्देश का अभी तक पालन नहीं किया है।
इससे छात्र-छात्राएं आए दिन परेशान हो रहे हैं और शैक्षिक प्रमाण-पत्र न मिलने के कारण रोजगार के अवसर भी हाथ से निकल रहे हैं। इस मामले की शिकायत छात्रों ने कुलपति से की है।
दरअसल, शैक्षिक सत्र की शुरुआत में ही छात्र-छात्राओं की संख्या यूनिवर्सिटी में बढ़ गई थी। इसे देखते हुए एकेटीयू ने इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों को निर्देश दिए थे कि वह छात्रों की समस्याओं को कॉलेज स्तर पर ही निपटाएं लेकिन इससे पहले हेल्प डेस्क बनाई जाए।
वर्तमान हालात ये हैं कि 70 फीसदी कॉलेजों ने अभी तक छात्रों की समस्याओं को दूर करने के लिए हेल्प डेस्क नहीं बनाया है। एक ओर तो यूनिवर्सिटी ने कॉलेज से नो ड्यूज लेना अनिवार्य कर दिया और दूसरी तरफ कॉलेजों द्वारा हेल्प डेस्क बनाई नहीं गई है।
ऐसे में छात्रों को दोहरी परेशानी से दो-चार होना पड़ रहा है। सवाल यह है कि आखिर छात्र अपने अंक पत्र, डिग्री या अन्य दस्तावेज कैसे प्राप्त करें। वहीं, कुछ छात्रों के दस्तावेजों में त्रुटि है तो वह भी दूर नहीं हो पा रही है।
मामले की शिकायत छात्रों ने कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक को पत्र लिखकर की है। यूनिवर्सिटी प्रवक्ता का कहना है कि इस मामले को लेकर कॉलेजों से सख्ती से पूछा गया है कि अब तकहेल्प डेस्क क्यों नहीं चालू की गई। इसके साथ ही कॉलेजों को निर्देश दिए हैं कि हेल्प डेस्क का बोर्ड लगाकर स्थान चिन्हित किया जाए और छात्रों की समस्याओं को दूर कराया जाए।
दस्तावेजों में त्रुटि होने से निकल रहा हाथ से रोजगारइंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के हजारों छात्रों को कॉलेजों की लापरवाही से रोजगार नहीं मिल पा रहा है। छात्रों को जो मौके मिल भी रहे हैं वह चाहकर भी उसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि उनके पास पूर्ण त्रुटिरहित दस्तावेज नहीं हैं।