छोटे-छोटे बच्चों को जिस तरह से इन दिनों स्कूलों की ओर से छुट्टियों में होमवर्क दिए जा रहे हैं वह बच्चों से ज्यादा से उनके अभिभावकों का काम बढ़ा रहा है। इसके बाद स्कूल वाले इन सब से इस तरह अनजान बन जाते हैं जैसे वह जानते ही नहीं कि ये होमवर्क बच्चों ने किया है या उनके मम्मी-पापा ने।
ऐसे ही एक होमवर्क की याद कर 9वीं क्लास के एक बच्चे के माता पिता बताते हैं कि कैसे उनके बच्चे को छुट्टियों में स्कूल से इलेक्ट्रिक सर्किट बनाने का प्रोजेक्ट मिला था।
इसी तरह एक और मम्मी पापा याद करते हैं कि जब उनकी बेटी 10 साल की थी तो उसे एक एम्यूजमेंट पार्क का थ्रीडी मॉडल बनाने को दिया गया था। बच्चों के अभिभावक बताते हैं कि कैसे अक्सर मई जून की गरमी की छुट्टियां ऐसे प्रोजेक्ट वर्क को पूरा करने के के आतंक में निकलती हैं।
अभिभावकों का कहना है कि कैसे उनके बच्चों को मिलने वाला प्रोजेक्ट वर्क उन दोनों के लिए ही एक बड़ा सिरदर्द होता है। आखिरकार जब उन लोगों के पास कोई चारा नहीं बचता तो उन्हें बाहरी विशेषज्ञ के पास जाकर प्रोजेक्ट पूरा कराना पड़ता है ताकि बच्चों के मार्क्स कम न हों।