हरियाणा शतरंज एसोसिएशन (एचसीए) ने प्रदेश सरकार से शतरंज को पाठ्यक्रम में शामिल करने अपील की है। उसका कहना है कि शतरंज को गुजरात, तमिलनाडु, गोवा व आंध्र प्रदेश में सरकार ने पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया है। अब समय आ गया है कि हरियाणा में भी ऐसा ही हो।
एचसीए ने दावा किया कि उसके प्रयासों से प्रदेश में शतरंज तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। सीबीएसई, केंद्रीय विद्यालय संगठन, डीएवी प्रबंधन व केंद्र के कई स्कूलों में भी शतरंज को अपने स्कूली पाठ्यक्रमों में स्थान दिया गया है।
प्रदेश शतरंज एसोसिएशन का कहना है कि इस खेल से शैक्षिक व बौद्धिक क्षमता का भी विकास होता है। जो विभिन्न परिस्थितियों से निपटने के लिए आत्मविश्वास भी पैदा करता है। शतरंज खेलने से गणित व विज्ञान विषयों पर अच्छी पकड़ बनती है।
ऐसे में शतरंज को गुजरात, तमिलनाडु और गोवा की तर्ज पर स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। एचसीए का कहना है कि उसके प्रयासों से प्रदेश के कई निजी स्कूलों में शतरंज की कक्षाओं के पीरियड लगने शुरू हो चुके हैं।
एचसीए के प्रदेश महासचिव कुलदीप ने कहा कि शतरंज कोई विदेशी खेल नहीं। इसका अविष्कार भारत में ही हुआ और फारस, अरब से होता हुआ पश्चिमी यूरोप पहुंचा। अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, अर्जेण्टीना, वेनेजुएला, हंगरी, जर्मनी, स्पेन, इटली, कनाडा, आर्मीनिया, इजरायल, मैक्सिको, पेरू, तुर्की, समेत अन्य कई देशों में कई वर्षो पहले से इस खेल को स्कूलों व कॉलेजों के पाठ्यक्रम में विषय के रूप में पढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा शतरंज का एक बड़ा उभरता हुआ हब है। यही कारण है कि प्रदेश सरकार से मांग की जा रही है कि इसे स्कूली शिक्षा में शामिल किया जाए।