देशभर में सीबीएसई से संबंद्ध स्कूलों के 10वीं-12वीं के छात्र अब अपने परीक्षा केंद्र ऑनलाइन देख सकेंगे। सीबीएसई मार्च 2017 में बोर्ड परीक्षाओं से छात्रों को यह सुविधा उपलब्ध कराने जा रहा है।
इसके तहत सेंटर की जानकारी से लेकर वहां तक पहुंचने व लगने वाले समय की जानकारी भी ऑनलाइन ही मिल जाएगी। यह सब सीबीएसई ऐप से संभव हो सकेगा। बोर्ड जेईई की परीक्षा ऑनलाइन कराने के बाद अब सीटीईटी परीक्षा भी ऑनलाइन कराने की तैयारी में है।
बोर्ड के अध्यक्ष राजेश कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि बोर्ड कई सुविधाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने जा रहा है। सबसे पहले वर्ष 2017 की बोर्ड परीक्षाओं से यह व्यवस्था शुरू होगी, ताकि छात्रों को अपने सेंटर तलाशने में परेशान न होना पड़े।
अब परीक्षा सेंटर की जानकारी, वहां पहुंचने का रूट मैप के संबंध में ऑनलाइन ही पता चल जाएगा। हमारा प्रयास है कि सीबीएसई की ओर से आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन ऑनलाइन कराया जाए।
दरअसल, बोर्ड जेईई (इंजीनियरिंग में दाखिले के लिए होने वाली) परीक्षा का ऑनलाइन आयोजन कराता है। उन्होंने कहा कि इस योजना पर काम हो रहा है, ताकि सीटीईटी का आयोजन भी ऑनलाइन ही हो।
बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि अब वर्ष 2017 से 10वीं में परीक्षा के लिए भराए जाने वाले फॉर्म को अभिभावक घर ले जाकर भर सकेंगे। अब तक स्कूल शिक्षक छात्र से जानकारी लेकर इस फॉर्म को भरते थे। इस कारण गलती की संभावना रहती थी।
एक क्लिक पर मिलेंगे दस्तावेज
बोर्ड छात्रों को उनकी अंक तालिका व अन्य दस्तावेज भी ऑनलाइन उपलब्ध कराने पर काम कर रहा है। चतुर्वेदी ने बताया कि दस्तावेजों को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया चल रही है।
इसके तहत बीते दस वर्षों के दस्तावेज चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। यदि किसी को ऑफलाइन दस्तावेज चाहिए होगा, तो वह किसी भी रीजन के कार्यालय में जाकर प्राप्त कर सकेगा।
बेहतर सुविधा लिए कमेटी गठित
बोर्ड संबंद्धता व परीक्षा सुधार के बॉयलाज (नियमों) को बेहतर करने के लिए भी काम कर रहा है। बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि इसके लिए पूर्व परीक्षा नियंत्रक पवनेश कुमार की अध्यक्षता में कमेटी बनाई है।
कमेटी को एक माह का समय दिया गया है। रिपोर्ट प्राप्त होने पर सुधार की दिशा में काम होगा। चतुर्वेदी ने बताया कि बोर्ड इस तरह से नियम बना रहा है कि स्कूलों में कार्रवाई का डर हो।
स्कूलों से सभी जानकारी व उनकी संबंद्धता की जानकारी मांगी गई है। इसे स्कूल को अपनी वेबसाइट पर भी देना होगा। इससे अभिभावकों को जानकारी होगी कि वह जो फीस दे रहे हैं, उसके अनुसार सुविधा मिल रही है या नहीं।