हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि राजधानी में किसी भी स्कूल में किताब, कॉपी व वर्दी के नाम पर व्यवसायिक गतिविधियां न हो। अदालत ने सीबीएसई को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि उनके द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी स्कूल में व्यवसायिक गतिविधियां न हो।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल व न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा की खंडपीठ ने कहा कि सीबीआई यह तय करे कि किसी भी स्कूल परिसर के अंदर यूनिफार्म व किताबें न बेची जाएं। अदालत ने सीबीएसई को स्वयं द्वारा इस मुद्दे पर जारी सर्कुलर को सख्ती से लागू करवाने को कहा है।
पेश मामले में समाजिक कार्यकर्ता सुनील पोखरियाल ने याचिका दायर कर तर्क रखा था कि अभिभावक कहीं से भी किताबें व यूनिफार्म खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं। बावजूद अधिकांश स्कूलों में किताबें व यूनिफार्म मार्केट से महंगी दरों पर बेची जा रही है।
उदाहरण के तौर पर जो जूते की जोड़ी बाजार में 500 रुपये में मिलती है, स्कूल में वह 1500 रुपये में बेची जा रही है। ऐसे में अदालत स्कूलों में व्यवसायिक गतिविधि रोकने के लिए उचित निर्देश जारी करें।
उन्होंने कहा इसी प्रकार किताबें व कॉपियां काफी ऊंची दरों पर बेची जाती है। स्कूल प्रशासन अभिभावकों को स्कूल में बनी दुकानों से ही सभी सामान खरीदने के लिए मजबूर करते है।
अदालत ने इस याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि 21 फरवरी 2011 को इस बारे में सीबीएसई ने एक नोटिस जारी किया था।
नोटिस के अनुसार कहा गया था कि उनसे मान्यता प्राप्त कोई भी स्कूल अपने परिसर के अंदर किसी भी प्रकार की व्यवसायिक गतिविधि नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि सीबीएसई नियमों के तहत इस नोटिस का अनुपालन सुनिश्चित करें।