आर्य संस्कृति की शिक्षा का प्रसार करने में एक सदी से जुटे गुरुकुल इंद्रप्रस्थ को आधुनिक विश्वविद्यालय का रूप देने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। अरावली की वादियों में बसा गुरुकुल पूर्ण रूप लेने के पर प्राचीन संस्कृति और आधुनिक शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र होगा। गुरुकुल का संचालन आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा कर रही है।
गुरुकुल इंद्रप्रस्थ की स्थापना वर्ष 1916 में स्वामी श्रद्धानंद ने की थी। उन्होंने अंग्रेजों के अनुदान को ठुकराते हुए कहा था कि वह सरकार के गुलाम पैदा करने के लिए गुरुकुल नहीं खोल रहे हैं। उन्होंने सराय ख्वाजा के एक परिवार से करीब 17000 रुपये में 217 एकड़ भूमि खरीदी थी।
जिस पर आज महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से मान्य शास्त्री तक शिक्षा प्रदान की जा रही है, वहीं स्कूली शिक्षा भिवानी बोर्ड से मान्यता प्राप्त है। फिलहाल यहां 86 बच्चे शिक्षा अर्जन कर रहे हैं।
100 एकड़ मुक्त भूमि किसी भी उपलब्ध
गुरुकुल के प्राचार्य ऋषिपाल ने बताया कि गुरुकुल शिक्षा की सीमाओं को देखते हुए एक पूरे विश्वविद्यालय स्थापित करने पर काम शुरू किया गया है। जिसके बारे में अभी तक राज्य सरकार का रवैया अच्छा रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए 25 एकड़ जमीन की आवश्यकता होती है, जबकि उनके पास 217 एकड़ भूमि है।
इसमें से भी 100 एकड़ भूमि तो किसी भी समय विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए मुक्त है। जिससे यह जिले की सबसे बड़े भूभाग पर स्थापित होने वाला विश्वविद्यालय हो सकता है।
परंपरा और आधुनिकता का संगम होगा यह विश्वविद्यालय
गुरुकुल विश्वविद्यालय के लिए जो प्रस्ताव राज्य सरकार को दिया गया है, उसमें वह सभी आधुनिक कोर्स संचालित करने की बात कही गई है, जिन्हें करने के लिए आज के युवाओं में होड़ सी देखी जाती है। इनमें एमबीए और बी टेक के कोर्स भी शामिल हैं।
गुरुकुल के प्राचार्य ऋषिपाल का कहना है कि यह प्रस्तावित विश्वविद्यालय अन्य विश्वविद्यालयों से अलग होगा। जहां बच्चों को आधुनिक शिक्षा और भारतीय संस्कृति एवं परंपरा के बारे में भी पढ़ाया जाएगा। यहां कुछ कोर्स आर्य समाज और गुरुकुलम पद्धति में भी संचालित किए जाएंगे।
विश्वविद्यालय से भारतीय निकलेंगे न कि इंडियन
इस प्रस्तावित विश्वविद्यालय से पढ़कर निकलने वाले छात्र भारतीय होंगे न कि इंडियन। इसका अर्थ है कि वह अपनी क्षमता से भारत को बढ़ाने के लिए कार्य करेंगे। छात्रों को भारतीय परंपरा एवं संस्कृति से रूबरू करवाया जाएगा। जिससे उनके अंदर राष्ट्रवाद की भावना का उदय होगा जो आजकल तेजी से कम हो रही है।