रैगिंग पर देशभर के डेंटल कॉलेजों को चेतावनी मिली है। दरअसल, भारतीय दंत चिकित्सा परिषद (डीसीआई) ने 31 अक्तूबर तक सभी कॉलेजों से रैगिंग रोकने के लिए किए गए कार्यों का विवरण मांगा है।
अगर इस अवधि में कॉलेज जानकारी नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ दंत चिकित्सा अधिनियम 1948 के खंड 16 ए के तहत मान्यता खत्म करने का कड़ा कदम उठाया जाएगा। डीसीआई ने सरकारी और प्राइवेट डेंटल कॉलेजों से कहा है कि जिनकी रिपोर्ट समय पर नहीं आएगी, उनके नाम सार्वजनिक करने के अलावा सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के समक्ष भी रखें जाएंगे।
ताकि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके। बता दें कि शैक्षणिक संस्थानों में रैगिंग पर पूर्ण रुप से प्रतिबंध लगाने और विद्यार्थियों को इसके प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से भारतीय दंत परिषद ने काफी सख्त नियम लागू कर रखे हैं।
हर वर्ष प्रवेश के दौरान न सिर्फ विद्यार्थी ही नहीं बल्कि उनके माता पिता को भी एक शपथ पत्र देना पड़ता है। इसी सिलसिले में परिषद ने सभी कॉलेजों से वर्ष 2016-17 के दौरान रैगिंग रोकने के लिए किए गए कार्यों की रिपोर्ट मांगी है।
परिषद के मुताबिक, डेंटल कॉलेज में प्रथम से लेकर अंतिम वर्ष तक के विद्यार्थियों को रैगिंग के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। साथ ही उन्हें रैगिंग पर सुप्रीम कोर्ट का प्रतिबंध होने और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी देने के लिए एक पुस्तिका भी दी जाती है।
इतना ही नहीं, कॉलेज परिसर में रैगिंग के खिलाफ पोस्टर लगाना, हॉस्टल वाडर्न का नंबर सांझा करने और कॉलेज के सदस्यों को विद्यार्थियों का काउंसलर बनाने जैसे कार्य कॉलेजों में किए जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की कमेटी को हर वर्ष की रिपोर्ट डीसीआई की ओर से सौंपी जाती है। पिछले कुछ वर्षों में देखने को मिला है कि कॉलेज प्रबंधन इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं। यही वजह है कि अब इन्हें 31 अक्तूबर तक का वक्त दिया गया है। अगर इस अवधि में रिपोर्ट जमा नहीं होती है तो ऐसे कॉलेजों के खिलाफ डीसीआई विनियम, 2009 के खंड 11.4 के अनुसार मान्यता तक खत्म की जा सकती है। -डा. सब्यसाची साहा, सचिव, भारतीय दंत परिषद