अब दाखिले के दौरान विश्वविद्यालय और कॉलेजों में स्टांप पेपर पर रैगिंग न करने का हलफनामा नहीं देना होगा। इसके बजाय छात्र-छात्राएं इस बाबत ऑनलाइन एफिडेविट देंगे।विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने एक आरटीआई के जवाब में यह जानकारी दी है।
आयोग ने कहा है कि सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए इससे जुड़े दिशानिर्देश जारी कर दिए गए हैं। दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को खासतौर पर बनाई गई नई वेबसाइट www.antiragging.in पर एफिडेविट देना होगा और इसकी कॉपी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को भी भेजनी होगी। अहम बात यह है कि इस ऑनलाइन हलफनामे में कोई भी दस्तावेज नहीं देना होगा।
मालूम हो कि पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शपथ पत्र और नोटरी की प्रक्रिया को अधिकतर स्थानों पर खत्म करने के लिए घोषणा की थी। इसके बाद कई संस्थानों ने इस तरह की प्रक्रिया को समाप्त कर दिया था। मगर अधिकतर कॉलेजों में यह व्यवस्था अभी भी लागू थी। इससे हर साल लाखों छात्र-छात्राओं को एक शपथ-पत्र देने के लिए 100 से 200 रुपये तक खर्च करने पड़ते थे।
इसी को देखते हुए राजकीय महाविद्यालय नोएडा के प्रोफेसर डॉ. राजीव कुमार गुप्ता ने सूचना के अधिकार के तहत यूजीसी से 23 अप्रैल 2016 को जानकारी मांगी थी। यूजीसी की ओर से 1 जून को जवाब देते हुए कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से गाइडलाइंस दी गई थी कि छात्र-छात्राओं के लिए शपथ पत्र ऑनलाइन ले लिया जाए।
छात्रों के यूजीसी की ओर से एक वेबपोर्टल www.antiragging.in बनाया गया है जिसपर छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन शपथ पत्र देना होगा। वेबसाइट से ही छात्र कॉलेज और संबंधित यूनिवर्सिटी को एफिडेविट की एक-एक कॉपी भेज सकेंगे।