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डीयू दाखिले में चलेगा 70-30 का फॉर्मूला

Fri, 02 Jun 2017 10:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली विश्वविद्यालय दाखिले में प्रैक्टिकल वाले विषयों के लिए 70-30 के अनुपात का फॉर्मूला ही अपनाया जाएगा। यानी 70 फीसदी अंक थ्योरी के लिए और 30 फीसदी प्रैक्टिकल के लिए। अगर किसी बोर्ड में यह अनुपात कम या ज्यादा है, तो उसे एक तय फॉर्मूले के तहत 70-30 के अनुपात में बांटा जाएगा। 
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इससे आवेदक को थ्योरी में फायदा, तो प्रैक्टिकल में 10 अंकों तक का नुकसान हो सकता है। इसलिए अगर किसी बोर्ड के छात्र का प्रैक्टिकल का रेश्यो ज्यादा है और वह फायदा लेने की सोच रहा है, तो उसके हाथ मायूसी ही लगेगी। क्योंकि प्रैक्टिकल के नंबर जितने ज्यादा होंगे, छात्र को नुकसान भी उतना ही ज्यादा होगा।

डीयू के मुताबिक, 70-30 का अनुपात सीबीएसई के फॉर्मूले से लिया गया है। इसे ही दाखिले के लिए मानक बनाया गया है। इस अनुपात में नंबरों को अपनाने के लिए डीयू ने एक फॉर्मूला तय किया है। इसके आधार पर अंकों में कटौती और बढ़ोतरी की जाती है। इससे अलग-अलग बोर्ड के सभी छात्रों को बराबरी का मौका मिलेगा। इससे उन छात्रों को नुकसान ज्यादा होगा, जिनके प्रैक्टिकल के अंकों का अनुपात ज्यादा होता है। 
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ऐसे निकालता है 70-30 का अनुपात
मान लीजिए किसी विषय में थ्योरी और प्रैक्टिकल का अनुपात 60-40 का है। आवेदक को उस विषय की थ्योरी में 60 में 54 नंबर और प्रैक्टिकल में 40 में 34 नंबर मिले हैं। थ्योरी के नंबर को 70 के अनुपात में लाने के लिए 54 डिवाइड बाई 60 करके 70 से मल्टीप्लाई करेंगे। यह करने पर आवेदक के 9 अंक बढ़ जाते हैं। 70 के अनुपात में उसके अंक 63 हो जाएंगे। इसी तरह अब प्रैक्टिकल का करेंगे, तो 34 डिवाइड बाई 40 करके 30 से मल्टीप्लाई करेंगे, तो उसके अब अंक 30 के अनुपात में 34 से घटकर 25.5 हो जाएंगे। यानी आवेदक को आठ से ज्यादा अंकों का नुकसान होगा।
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