सीबीआई ने गुरुग्राम में एक कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए 43 संदिग्ध साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी विदेशियों को उनके कंप्यूटर की समस्याओं का तकनीकी समाधान देने का लालच देकर ठगते थे। केंद्रीय एजेंसी ने दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा में 7 स्थानों पर भी तलाशी ली। इस दौरान केंद्रीय एजेंसी ने 130 कंप्यूटर हार्ड डिस्क, 65 मोबाइल फोन, पांच लैपटॉप, आपत्तिजनक दस्तावेज, वित्तीय लेनदेन विवरण, कॉल रिकॉर्डिंग, पीड़ितों के विवरण जब्त कीं।
एजेंसी के प्रवक्ता ने शुक्रवार को बताया कि ऑपरेशन चक्र-III के तहत गुरुग्राम स्थित इनोसेंट टेक्नोलॉजी (ओसपीसी) प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय पर सीबीआई ने छापा मारा, जहां विदेशियों को ठगने के उद्देश्य से लाइव कॉल पर कई एजेंट मिले। सीबीआई आगे की कार्रवाई के लिए इंटरपोल के जरिये एफबीआई और कई देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के संपर्क में है।
एजेंसी ने बताया कि पीड़ितों को उनके सिस्टम पर ऐसे सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने के लिए कहा गया था, जिससे उनके कंप्यूटर ब्लॉक हो जाए। बाद में आरोपी पीड़ितों को उनके सिस्टम ठीक करने के लिए भुगतान करने के कहते थे। जांच में पता चला है कि अपराध की काली कमाई कई देशों से हांगकांग तक पहुंचाई गई थी।
सीबीआई ने तिहाड़ से वसूली रैकेट चलाए जाने की प्रारंभिक जांच शुरू की
उधर, केंद्रीय जांच ब्यूरो ( सीबीआई ) ने राष्ट्रीय राजधानी में तिहाड़ और अन्य जेलों से जबरन वसूली का रैकेट चलाए जाने के आरोपों पर प्रारंभिक जांच शुरू की है। महाठग सुकेश चंद्रशेखर ने एफआईआर दर्ज करने के लिए सीबीआई को निर्देश देने की मांग करते हुए 2022 में एक याचिका दायर की थी। इसके बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष इस मामले में एक स्थिति रिपोर्ट दायर की। जस्टिस अमित शर्मा ने 19 जुलाई के एक आदेश में उल्लेख किया कि सीबीआई की ओर से एक स्थिति रिपोर्ट दायर की गई है। जस्टिस शर्मा ने आदेश में कहा, सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक ने स्थिति रिपोर्ट रिकॉर्ड में रखी है, जो दर्शाती है कि याचिकाकर्ता के आरोपों पर प्रारंभिक जांच शुरू की गई थी। अदालत ने इस मामले को इस साल 18 नवंबर को सुनवाई के लिए फिर से अधिसूचित किया है।