जेएनयू हिंसा की जांच कर रही फोरेंसिक टीम शुक्रवार को फिर कैंपस पहुंची। फोरेंसिक टीम के साथ क्राइम ब्रांच की भी टीम मौजूद थी। फोरेंसिक टीम कैंपस गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरों के डीवीआर जांच के लिए ले गई। जेएनयू कैंपस में शुक्रवार दोपहर करीब 12:30 बजे फोरेंसिक टीम दाखिल हुई।
टीम ने गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरे को सीढ़ी लगाकर चेक किया। गेट पर कुछ देर तक रुकने के बाद टीम प्रशासनिक भवन की ओर चली गई। टीम ने कैंपस में लगे सभी कैमरों को बारीकी से जांच कर उसे कब्जे में ले लिया। वहीं, कैंपस के बाहर पुलिस गश्त करती नजर आई। किसी भी संदिग्ध को देखकर उससे पूछताछ के बाद ही आगे जाने दिया जा रहा था। ब्यूरो
हिंसा में छात्रों की सोच पर चोट की गई है
राजनीति शास्त्र से स्नातकोत्तर कर रही चारूकेशी भट जेएनयू कैंपस को महिलाओं के लिये सबसे सुरक्षित मानती थी लेकिन रविवार शाम छात्रों पर हुये हमले के बाद विचलित तथा असुरक्षित महसूस कर रही है। मूलरूप से वाराणसी यूपी निवासी 24 वर्षीय छात्रा का कहना है कि इस घटना ने छात्रों की सोच पर हमला किया है जिससे उनकी दिनचर्या व करियर की योजना प्रभावित हुयी है।
छात्रा का कहना है कि यह इस हमले से पहले जेएनयू कैंपस में कहीं भी कभी भी आ-जा सकती थी लेकिन अब रात को हॉस्टल से बाहर निकलते समय अपने किसी पुरुष दोस्त को साथ लेना पड़ता है। जेएनयू की छात्राओं को कितना भी आजाद खयाल समझा जाये लेकिन इस हमले ने हमारी मानसिकता पर चोट की है।
जेएनयू कैंपस में शुक्रवार को सन्नाटा पसरा था और बेहद कम लोग वहां घूमते और ढाबों पर नजर आये। हमले से डर कर बहुत से छात्र अपने दोस्तों के कमरों में शिफ्ट हो चुके हैं। एक छात्रा ने बताया कि अभी भी हिंसा की आशंका है और यह सब जेएनयू का माहौल खराब करने के लिये किया जा रहा है। एक छात्रा ज्योति का कहना है कि रविवार शाम उसने जेएनयू की लड़कियों को पहली बार दहशत में देखा था। यह हिंसा छात्रों को डराने के लिये ही की गयी थी। हम इससे डरेंगे नहीं और इसके खिलाफ लड़ा जायेगा।