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हिंसा के बाद जेएनयू नहीं जा रहे कैब व ऑटो चालक

Sat, 11 Jan 2020 05:21 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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jnu violence - फोटो : अमर उजाला
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जेएनयू कैंपस में रविवार शाम हुई हिंसा के बाद कैब व ऑटो चालक वहां जाने और वहां से सवारी लेेना तकरीबन बंद कर दिया है। कई छात्रों का कहना है कि कैंपस के हालात के मद्देनजर कैब व ऑटो चालक वहां आने जाने से इंकार कर रहे हैं। इस कारण छात्रों को अन्य स्थानों पर जाने के लिये कैब या ऑटो तक जाने के लिय काफी पैदल चलना पड़ रहा है। 

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छात्रा देबोमिता चैटर्जी ने बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ प्रदर्शन के लिये मंडी हाउस जाना चाहती थी लेकिन कैब चालक ने कैंपस में आने से इंकार कर दिया। कैब चालक ने उन्हें अरुणा आसफ अली रोड के टी-प्वाइंट पर आने के लिये कहा। कैब लेने के लिये इन छात्राओं को वहां तक पैदल जाना पड़ा। कैंपस के नॉर्थ गेट से आगे सड़क के दोनों ओर पुलिस बेरीकेडिंग से भी छात्रों को काफी पैदल चलना पड़ रहा है। 

 वहीं कई छात्रों का कहना है कि जेएनयू कैंपस की जानकारी मिलने के बाद कई कैब चालक राइड कैंसल कर रहे हैं। एक कैब चालक ने बताया कि जेएनयू में हालात ऐसे हैं कि जोखिम नहीं लिया जा सकता क्योंकि कोई भी कैब को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि कैंपस से कुछ दूरी पर कैब यात्रियों को ले जा रही है। ज्यादातर कैब चालकों का कहना है कि सुरक्षा सर्वोपरि है। हौज खास मेट्रो स्टेशन पर कई ऑटो चालकों ने या तो जेएनयू जाने से साफ मना कर दिया या वहां से चले गये।
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एक ऑटो चालक सतपाल ने बताया कि वह जोखिम नहीं ले सकता क्योंकि वहां हालात खराब हैं। वह गरीब है और ऑटो ही उसकी जीविका का साधन है। वहां के हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं, कौन जानता था कि रविवार इतना भयानक हो सकता था। वहीं दूसरे ऑटो चालक दलजीत सिंह ने कहा कि वह यात्रियों को जेएनयू मेन गेट या फिर पुलिस बेरीकेड तक लेकर जा रहा है। जब हिंसा हुई तब मेरा भाई कैंपस में था और वहां घिर गया था। इसके बाद भी सवारियों को वहां लेकर जा रहा हूं।

 

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फोरेंसिक टीम ने कैंपस में लगे कैमरों  के डीवीआर को कब्जे में लिया

जेएनयू हिंसा की जांच कर रही फोरेंसिक टीम शुक्रवार को फिर कैंपस पहुंची। फोरेंसिक टीम के साथ क्राइम ब्रांच की भी टीम मौजूद थी। फोरेंसिक टीम कैंपस गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरों के डीवीआर जांच के लिए ले गई। जेएनयू कैंपस में शुक्रवार दोपहर करीब 12:30 बजे फोरेंसिक टीम दाखिल हुई।

टीम ने गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरे को सीढ़ी लगाकर चेक किया। गेट पर कुछ देर तक रुकने के बाद टीम प्रशासनिक भवन की ओर चली गई। टीम ने कैंपस में लगे सभी कैमरों को बारीकी से जांच कर उसे कब्जे में ले लिया। वहीं, कैंपस के बाहर पुलिस गश्त करती नजर आई। किसी भी संदिग्ध को देखकर उससे पूछताछ के बाद ही आगे जाने दिया जा रहा था। ब्यूरो

हिंसा में छात्रों की सोच पर चोट की गई है
राजनीति शास्त्र से स्नातकोत्तर कर रही चारूकेशी भट जेएनयू कैंपस को महिलाओं के लिये सबसे सुरक्षित मानती थी लेकिन रविवार शाम छात्रों पर हुये हमले के बाद विचलित तथा असुरक्षित महसूस कर रही है। मूलरूप से वाराणसी यूपी निवासी 24 वर्षीय छात्रा का कहना है कि इस घटना ने छात्रों की सोच पर हमला किया है जिससे उनकी दिनचर्या व करियर की योजना प्रभावित हुयी है।

छात्रा का कहना है कि यह इस हमले से पहले जेएनयू कैंपस में कहीं भी कभी भी आ-जा सकती थी लेकिन अब रात को हॉस्टल से बाहर निकलते समय अपने किसी पुरुष दोस्त को साथ लेना पड़ता है। जेएनयू की छात्राओं को कितना भी आजाद खयाल समझा जाये लेकिन इस हमले ने हमारी मानसिकता पर चोट की है। 

जेएनयू कैंपस में शुक्रवार को सन्नाटा पसरा था और बेहद कम लोग वहां घूमते और ढाबों पर नजर आये। हमले से डर कर बहुत से छात्र अपने दोस्तों के कमरों में शिफ्ट हो चुके हैं। एक छात्रा ने बताया कि अभी भी हिंसा की आशंका है और यह सब जेएनयू का माहौल खराब करने के लिये किया जा रहा है। एक छात्रा ज्योति का कहना है कि रविवार शाम उसने जेएनयू की लड़कियों को पहली बार दहशत में देखा था। यह हिंसा छात्रों को डराने के लिये ही की गयी थी। हम इससे डरेंगे नहीं और इसके खिलाफ लड़ा जायेगा।
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