दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बेड़े में एक हजार लो फ्लोर एसी बसों को शामिल करने का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में दिल्ली कैबिनेट की बैठक में परिवहन विभाग के इससे जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। साथ ही क्लस्टर स्कीम में 650 लो फ्लोर एसी बसों की खरीद प्रक्रिया को भी कैबिनेट ने मंजूर किया है। इसके अलावा राजघाट ताप विद्युत संयंत्र को सोलर पार्क में बदलने पर कैबिनेट राजी है।
कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बृहस्पतिवार को बताया कि दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन और प्रदूषण से जुड़े दो अहम फैसले लिए गए। इसमें डीटीसी के बेड़े में 1,000 लो फ्लोर एसी बसें खरीदी जानी हैं। कैबिनेट ने इसको मंजूर कर लिया है। वहीं, क्लस्टर स्कीम के तहत 650 लो फ्लोर एसी बसों को खरीदने की प्रक्रिया भी कैबिनेट ने मंजूर कर ली है।
मनीष सिसोदिया ने बताया कि दिल्ली की सड़कों पर अगले साल मई-जून तक 9,500 बसें मौजूद रहेंगी। फिलहाल बसों का बेड़ा 5,500 का है। डीटीसी के बेड़े में शामिल होने वाली लो फ्लोर एसी बसें जनवरी से आनी शुरू हो जाएंगी। इससे दिल्ली की परिवहन व्यवस्था में बुनियादी बदलाव आएगा। इसका सीधा असर दिल्ली के पर्यावरण प्रदूषण में सुधार के तौर पर दिखेगा।
दिल्ली में बसों का बेड़ा बढ़ाने की तयशुदा समय-सीमा
-क्लस्टर स्कीम के तहत 1,000 स्टैंडर्ड फ्लोर बसें खरीदने की प्रक्रिया चल रही है। बसें इस महीने के आखिर से सड़कों पर आने लगेंगी। दिसंबर 2019 तक सभी बसें सड़कों पर आ जाएंगी।
-क्लस्टर स्कीम के तहत ही 1,000 लो फ्लोर एसी बसों को खरीदने की प्रक्रिया चल रही है। इसमें से 650 बसों की निविदा आवंटित करने को बृहस्पतिवार को मंजूरी दी गई। अगले 15 दिन में निविदा आवंटित कर दी जाएगी। यह बसें दिसंबर से अप्रैल के बीच आ जाएंगी। इसके अलावा बची 350 बसों का टेंडर 19 जुलाई को खुलेगा। अप्रैल 2020 तक सभी बसें सड़क पर होंगी।
-क्लस्टर स्कीम के तहत ही 1,000 इलेक्ट्रिक बसें भी आनी हैं। दो अगस्त को इसका टेंडर खुलेगा। जनवरी से अप्रैल तक यह बसें भी सड़कों पर आ जाएंगी।
-दिल्ली सरकार का दावा है कि अभी दिल्ली में बसों का बेड़ा 5,500 का है। जून 2020 तक दिल्ली में डीटीसी व क्लस्टर में 9,500 बसें हो जाएंगी।
राजघाट ताप विद्युत संयंत्र सौर में होगा तब्दील
दिल्ली कैबिनेट ने राजघाट ताप विद्युत संयंत्र को सौर ऊर्जा संयंत्र में बदलने के ऊर्जा विभाग के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। मनीष सिसोदिया ने बताया कि राजघाट प्लांट को आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया जाएगा। हालांकि, प्रदूषण के कारण 2015 से ही यहां उत्पादन नहीं हो रहा है। कैबिनेट ने इसे आधिकारिक तौर पर बंद करने का फैसला ले लिया है। इसकी जगह अब प्लांट के 45 एकड़ में सोलर पार्क बनाया जाएगा। इस पार्क से करीब 5,000 किलोवाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा।