एप आधारित कैब कंपनियां यदि यात्रियों को कम किराये पर बेहतर सुविधा प्रदान कर रही हैं तो उन्हें कैसे रोका जा सकता है। हाईकोर्ट ने उक्त टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान व्यावसायिक दौड़ में उपभोक्ता किंग की भूमिका में है और वही तय करता है कि उसे क्या पसंद है क्या नहीं।
फिलहाल अदालत ने दिल्ली सरकार को रेडियो टैक्सी के लिए तय न्यूनतम प्राइस मुद्दे पर अपना पक्ष साफ करने का निर्देश दिया है। दरअसल, अदालत मैजिक सेवा टैक्सी सर्विस द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि एक आधारित ओला-उबर इत्यादि कैब कंपनियां सरकार द्वारा तय दरों संबंधी दिशा-निर्देश का उल्लंघन कर रही हैं। यह कंपनियां न्यूनतम दरों से काफी कम दरों पर किराया ले रही हैं तो कभी तय दरों से अधिक।