यूपी में रेरा अभी नहीं लागू हुआ
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अगर बिल्डर के पास पैसा नहीं है तो जिला प्रशासन उसके प्रोजेक्ट के फ्लैटों को कब्जे में लेकर नीलाम कर खरीदारों की धनराशि वसूलेगा। प्रोजेक्ट को सील नहीं किया जाएगा। बृहस्पतिवार को यूपी रेरा के अध्यक्ष राजीव कुमार ने बृहस्पतिवार को गौतमबुद्ध नगर के डीएम बीएन सिंह व एडीएम वित्त एवं राजस्व एमएन उपाध्याय और गाजियाबाद के एसडीएम के साथ बैठक कर यह फैसला लिया है।
रेरा ने कई मामलों में खरीदारों को पैसा वापस लौटाने का आदेश बिल्डरों को दिया है, लेकिन बिल्डर उसका पालन नहीं कर रहे हैं। आदेश का पालन नहीं होने पर रेरा अभी तक करीब 1000 रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी कर चुका है। जिन पर संबंधित जिला प्रशासन वसूली की कार्रवाई कर रहा है। लेकिन कई आरसी वापस आ रही हैं।
कुछ में पैसा नहीं मिलने पर प्रशासन बिल्डर के प्रोजेक्ट को सील कर चुका है। आरसी जारी होने के बाद भी खरीदारों का पैसा नहीं मिल रहा है। इसको लेकर बृहस्पतिवार को रेरा के अध्यक्ष राजीव कुमार ने बैठक की। बैठक में रेरा के सदस्य बलविंदर कुमार भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि अगर बिल्डर के पास पैसा नहीं है तो उस स्थिति में प्रोजेक्ट को सील नहीं किया जाएगा।
बल्कि प्रशासन उन फ्लैटों को अपने कब्जे में लेगा, जो अभी तक बिके नहीं है। उनकी नीलामी कराकर खरीदारों का पैसा वसूला जाएगा। पहले चरण में सुपरटेक, थ्री-सी, लॉजिक्स समेत अन्य बड़े बिल्डरों पर कार्रवाई होगी।
कोयला खदानों की तरह होगी ई-नीलामी
हाल ही में कोयला खदान की ई-नीलामी के माध्यम से आवंटन किया गया था। उसी तरह की प्रक्रिया प्रोजेक्टों के फ्लैटों को बेचने में अपनाई जाएगी। रेरा के सदस्य बलविंदर कुमार ने बताया कि भारत सरकार की एक एजेंसी से पोर्टल तैयार कराया जाएगा। वहीं फ्लैटों का निरीक्षण कर नीलामी की धनराशि तय करेगी। उसके बाद पोर्टल पर ही नीलामी होगी। नीलामी से जो पैसा आएगा, उससे खरीदारों का पैसा लौटा जाएगा।
फ्लैट नहीं बेचे जाने का बहाना नहीं चलेगा
बिल्डर पैसा नहीं होने का दावा करते है। कहते है कि प्रोजेक्ट तैयार है, लेकिन फ्लैट नहीं बिक रहे हैं। ई-नीलामी से बिल्डरों का यह बहाना भी नहीं चलेगा। प्रशासन नीलामी कर फ्लैट बेचेगा।