ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल-2026 को कैबिनेट की मंजूरी, ज्यादातर मंजूरी प्रक्रियाएं होंगी ऑनलाइन
सिंगल विंडो से मिलेंगी मंजूरियां, कम जोखिम वाले कारोबार में सेल्फ सर्टिफिकेशन की सुविधा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में कारोबार शुरू करने और संचालित करने की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026 को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में बिल को मंजूरी दी गई। अब इसे आवश्यक कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय भेजा जाएगा।
प्रस्तावित कानून के तहत कारोबारियों को अलग-अलग विभागों में लाइसेंस, पंजीकरण और अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए चक्कर नहीं लगाने होंगे। इसके लिए सिंगल विंडो व्यवस्था लागू की जाएगी। भवन योजना, अग्निशमन मंजूरी, पानी, सीवर और बिजली कनेक्शन जैसी सेवाओं को भी ऑनलाइन व्यवस्था से जोड़ने का प्रस्ताव है। दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) को इसका नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से कारोबार शुरू करने में लगने वाला समय, लागत और अनिश्चितता कम होगी। इससे निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
कम जोखिम वाले कारोबार में तुरंत मंजूरी
बिल की अनुसूची-3 में शामिल कम जोखिम वाली गतिविधियों के लिए आवेदन के साथ ही अनुमति, लाइसेंस या एनओसी देने का प्रावधान है। तय श्रेणी और सीमा में आने वाले कारोबार में सेल्फ सर्टिफिकेशन स्वीकार किया जाएगा। इससे छोटे कारोबारियों को सामान्य गतिविधियों के लिए लंबी मंजूरी प्रक्रिया से राहत मिलेगी।
- अनुसूची-3 से बाहर की गतिविधियों के लिए भी मंजूरी की प्रक्रिया समयबद्ध होगी। निर्धारित अवधि में सक्षम अधिकारी ने निर्णय नहीं लिया तो बिल के प्रावधानों के अनुसार मंजूरी मानी जाएगी। इससे फाइल लंबित रहने के कारण कारोबार शुरू करने में होने वाली देरी कम होगी।
-सरकार के पास पहले से मौजूद दस्तावेज भी दोबारा नहीं मांगे जाएंगे। किसी विभाग या प्राधिकरण के रिकॉर्ड में उपलब्ध जानकारी को कारोबारी को फिर से जमा नहीं करना होगा।
तीन साल तक नियमित निरीक्षण नहीं
नए पंजीकरण के बाद उद्यमों को तीन साल तक सामान्य निरीक्षण से राहत देने का प्रावधान है। हालांकि, गंभीर शिकायत मिलने पर जांच की जा सकेगी। सरकार का कहना है कि इससे सामान्य कारोबार में अनावश्यक निरीक्षण कम होंगे।
दोहरा पंजीकरण नहीं : जीएसटी, एफएसएसएआई, एमएसएमई विकास अधिनियम या श्रम संहिताओं के तहत पहले से पंजीकृत उद्यमों को अलग से ट्रेड, हेल्थ ट्रेड, ईटिंग हाउस या दुकान-प्रतिष्ठान पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी।
जो प्रतिबंधित नहीं, उसे ऑटो ग्रीन सिग्नल : बिल में नेगेटिव लिस्ट आधारित व्यवस्था भी प्रस्तावित है। यानी जो गतिविधि प्रतिबंधित सूची में नहीं होगी, उसे अनुमत माना जाएगा। सरकार के अनुसार इससे अनावश्यक नियमन घटेगा और कारोबारियों के लिए नियम अधिक स्पष्ट होंगे।
निवेश अनुकूल बनाने का लक्ष्य
प्रस्तावित कानून कारोबार और सरकार के बीच संबंधों को नियंत्रण के बजाय विश्वास, सहयोग और सुविधा पर आधारित बनाने की दिशा में कदम है। सरकार का लक्ष्य दिल्ली को निवेश और कारोबार के लिए अधिक अनुकूल बनाना है।
रेखा गुप्ता, मुख्यमंत्री