लेकिन सीलिंग की इस बार होने वाली कार्रवाई ने उन्हें सड़कों पर खड़ा कर दिया है। अब न तो काम करने की जगह है और न ही कर्मी होंगे, फिर कैसे गुजारा करेंगे, इसी चिंता में डूबे संतोख सिंह भी रविवार को दुकान को खाली करने में जुटे रहे। दलजीत ङ्क्षसह ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई हिटलरशाही है। कबाड़ बन चुकी कारें यहां आती हैँ, जिनके पाट्र्स अलग अलग बेच दिए जाते हैं। इससे होने वाला प्रदूषण क्या इतना अधिक है कि उनके कारोबार बंद करने के लिए सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है। बार -बार जगह बदले जाने से मुश्किलें इतनी बढ़ गई हैं कि इस बार अधिकतर कारोबारियों को संभलने का कोई रास्ता भी नजर नहीं आ रहा है।
सीलिंग से सैकड़ों परिवारों के लिए उठ गए कई सवाल
मायापुरी इंडस्ट्रियल एरिया में दुकानों में दिल्ली के अलग अलग इलाकों से गाडिय़ां पहुंचती हैं। दुकानदारों का कहना है कि इन वाहनों के दस्तावेज देखने के बाद अलग अलग हिस्सों में कर, इनके पाट्र्स आगे बेच दिए जाते हैं। फिर इन्हें दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाया जाता है। दुकानदारों की दलील है कि अगर प्रदूषण के मानकों की अनदेखी हो रही है तो इसके लिए उपाय लागू करने के आदेश देने की बजाय सीलिंग की कार्रवाई से सैकड़ों परिवारों के लिए कई सवाल खड़े होने लगे हैं।