छोटे उद्योगों का सुधरेगा भविष्य, कायाकल्प के लिए 10.28 करोड़ की परियोजना
ओखला, नरेला, बवाना, वजीरपुर, पटपड़गंज और मायापुरी में खुलेंगे बिजनेस फेसिलिटी सेंटर
आदित्य पाण्डेय
नई दिल्ली।
दिल्ली के छोटे कारोबारियों को लाइसेंस, सरकारी मंजूरी, बैंक ऋण, तकनीक और बाजार से जुड़ी सहायता के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे। दिल्ली सरकार और दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) ने छह प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में बिजनेस फैसिलिटेशन सेंटर (बीएफसी) खोलने की योजना तैयार की है। ओखला, नरेला, बवाना, वजीरपुर, पटपड़गंज और मायापुरी में बनने वाले इन केंद्रों पर उद्यमियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी के साथ मंजूरियों, वित्त, तकनीक और बाजार से जुड़ी सेवाओं के लिए मार्गदर्शन मिलेगा।
दिल्ली में करीब 13.20 लाख एमएसएमई हैं, जिनमें 9.7 लाख उद्यम उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत हैं। राजधानी के कुल उद्योगों में 96 प्रतिशत से अधिक सूक्ष्म इकाइयां हैं और यह क्षेत्र 60 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है। ऐसे में छोटे उद्योगों की वित्तीय और तकनीकी जरूरतों को एकीकृत तरीके से पूरा करने की पहल को रोजगार और कारोबार विस्तार के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
एमएसएमई के लिए तैयार इस परियोजना पर कुल 10.28 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें करीब 4.17 करोड़ रुपये छह बीएफसी स्थापित करने पर खर्च होंगे। डीएसआईआईडीसी इन केंद्रों के लिए जल्द स्थान उपलब्ध कराएगा। केंद्रों के माध्यम से उद्यमियों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, जरूरी अनुमतियां हासिल करने, डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ने और सप्लाई चेन बेहतर करने में सहायता दी जाएगी।
चार विशेषज्ञ बताएंगे कारोबार बढ़ाने का रास्ता
हर बीएफसी में चार विशेषज्ञ तैनात किए जाएंगे। नीति विशेषज्ञ सरकारी योजनाओं और संबंधित विभागों के बीच समन्वय में मदद करेगा। वित्त विशेषज्ञ परियोजना रिपोर्ट तैयार कराने और बैंक ऋण की प्रक्रिया में सहयोग देगा। सप्लाई चेन और एंटरप्राइज डेवलपमेंट विशेषज्ञ उत्पादन तथा कारोबारी प्रक्रियाओं में सुधार के सुझाव देगा। वहीं, मार्केटिंग विशेषज्ञ ब्रांडिंग, ऑनलाइन बिक्री और नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद करेगा।
केंद्रों की निगरानी करेगा दिल्ली एमएसई हब
छह बीएफसी के ऊपर एक केंद्रीय दिल्ली एमएसई हब बनाया जाएगा। यह हब उद्योगों की जरूरतों का अध्ययन कर नीतियों और योजनाओं को तैयार करने में सहायता करेगा। इसमें अंतरराष्ट्रीय व्यापार, उत्पाद विकास, तकनीक और स्थिरता से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे। इसका उद्देश्य दिल्ली के उत्पादों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के साथ उन्हें देश और विदेशी बाजारों तक पहुंचाने में सहयोग करना है।
250 उद्योगों की होगी गहन जांच
परियोजना के दूसरे हिस्से पर 6.11 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। चैंपियन एमएसएमई योजना के तहत 250 संभावनाशील उद्योगों का चयन किया जाएगा। इन इकाइयों का वित्तीय, तकनीकी और अनुपालन ऑडिट होगा। विशेषज्ञ उत्पादन में आने वाली अड़चनों, पुरानी मशीनरी और कारोबार विस्तार में बाधाओं की पहचान करेंगे। इसके बाद जरूरत के अनुसार तकनीकी और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
400 इकाइयों को ग्रीन कारोबार की ट्रेनिंग
योजना के तहत 400 एमएसएमई को पर्यावरण अनुकूल उत्पादन की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इन्हें ईएसजी टूलकिट, क्षमता निर्माण तथा जेडईडी और लीन प्रमाणन की दिशा में सहायता मिलेगी। इससे इकाइयों को कम लागत में अधिक दक्ष और टिकाऊ उत्पादन अपनाने में मदद मिलेगी।
80 महिला उद्यमियों पर विशेष जोर
250 चैंपियन एमएसएमई में कम से कम 80 इकाइयां महिला उद्यमियों की होंगी। इन्हें कारोबार विस्तार के लिए विशेष तकनीकी और वित्तीय मार्गदर्शन दिया जाएगा। कम से कम 25 चैंपियन इकाइयों को बैंक ऋण और क्रेडिट सीमा बढ़ाने में विशेषज्ञ सहायता दिलाने का लक्ष्य भी रखा गया है। साथ ही पारंपरिक कारोबारियों को सरकारी ई-मार्केटप्लेस, ओएनडीसी और अन्य ऑनलाइन बाजारों से जोड़ने की तैयारी है।