केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने एआईपीएमटी की परीक्षा में मुस्लिम युवतियों को हिजाब, बुर्का पहन कर आने की इजाजत दे दी है। साथ ही अन्य उम्मीदवार भी अपने पारंपरिक परिधानों को पहन कर आ सकेंगे।
एआईपीएमटी परीक्षा के लिए ड्रेस कोड लागू करने के बाद से इस पर विवाद हो रहा था। लिहाजा सीबीएसई ने ड्रेस कोड में बदलाव की घोषणा की है। ऐसे परिधान पहन कर आने वाले उम्मीदवारों को तय समय से आधे घंटे पूर्व आना होगा ताकि उनकी मेटल डिटेक्टर से जांच की जा सके।
सीबीएसई अधिकारियों के अनुसार अब ड्रेस कोड में मुस्लिम परीक्षार्थी पारंपरिक वस्त्र पहन कर आ सकेंगे। इसके साथ ही अन्य परीक्षार्थियों के लिए भी पारंपरिक परिधानों को पहन कर आने की मनाही नहीं होगी।
इन चीजों की भी इजाजत
इस तरह से यदि कोई उम्मीदवार पर्दे में आना चाहे या फिर मौसम खराब होने के कारण जूते पहन कर आता है तो उसे परीक्षा केंद्र पर आने की इजाजत होगी। सीबीएसई ने परीक्षा सेंटर पर पहुंचने का समय 7:30 से 9:30 बजे का तय किया है।
लेकिन यदि उम्मीदवार अपने पारंपरिक परिधान पहन कर आता है तो उसे समय से आधा घंटा पहले पहुंचना होगा। दरअसल कुछ उम्मीदवारों को इस बात पर भी आपत्ति थी कि जिन जगहों पर मौसम खराब रहता है या बारिश के बाद कीचड़ हो जाता है तो उन स्थानों पर कैसे उम्मीदवार आधी बाजू की शर्ट व चप्पल में आ सकता है।
मालूम को 25 जुलाई को होने वाली एआईपीएमटी परीक्षा के लिए केरल हाईकोर्ट ने दो मुस्लिम छात्राओं को हिजाब व फुल स्लीव ड्रेस पहनने की इजाजत दी है।
धार्मिक कपड़े पहनकर आना है तो जल्दी आएं
कोर्ट ने मंगलवार को सीबीएसई को यह आदेश दिया। जिसके बाद सीबीएसई ने इसे सभी के लिए मान्य कर दिया। दरअसल, कोर्ट में दलील दी गई थी कि हिजाब उनके धार्मिक रिवाजों के हिसाब से जरूरी है।
उल्लेखनीय है कि सीबीएसई ने दोबारा आयोजित हो रही एआईपीएमटी परीक्षा में किसी भी तरह के नकल को रोकने के लिए इस बार ड्रेस कोड लागू किया है।
जिसमें हल्के आधी आस्तीन के कपड़े, आधी बाजू की कमीज पहन कर आने को कहा गया था। साथ ही ऐसा कुर्ता पहन कर आने को कहा गया था जिस पर बड़े बटन व जड़ाऊ पिन या कोई बैज फूल न लगे हो। वहीं जूते की बजाए केवल चप्पल पहन कर आने के आदेश जारी किए गए थे।