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समय के साथ पूरे परिवार को भ्रम में डाल सकता है दिमागी मरीज, मनोवैज्ञानिक टेस्ट से ही खुल सकता है राज

Thu, 05 Jul 2018 12:15 AM IST
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
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burari death case - फोटो : अमर उजाला
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बुराड़ी केस में दिल्ली के मनोचिकित्सकों का मानना है कि कोई भी दिमागी रुप से बीमार व्यक्ति समय के साथ पूरे परिवार को भ्रम में डाल सकता है। पिछले कुछ दिनों से सामने आ रही रजिस्टर और उसमें लिखी बातों की थ्योरी से लगता है कि ललित मनोविकार से पीड़ित था। इन विशेषज्ञों को लगता है कि बगैर मनोवैज्ञानिक अंत्य परीक्षण के इस राज से पर्दा नहीं उठ सकता। हालांकि इनका यह भी कहना है कि ये केस काफी उलझा हुआ है।  

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एम्स की पूर्व मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मंजू मेहता की मानें तो आमतौर पर मनोवैज्ञानिक अंत्य परीक्षण के जरिए मौत का कारण समझने की संभावना लगभग आधी होती है, लेकिन अगर आत्महत्या के साथ कोई नोट या डायरी मिलती है तो ये संभावना बढ़ जाती है। बुराड़ी केस में मिले रजिस्टर और डायरी मनोवैज्ञानिक अंत्य परीक्षण के लिए काफी साबित हो सकते हैं।  

उधर मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी पाराशर का कहना है कि भाटिया परिवार का कोई सदस्य जरूर मानसिक तौर पर पीड़ित हो सकता है। जब एक सदस्य इस तरह की परेशानी से ग्रस्त है और वह इलाज न कराकर घर में बाकी सदस्यों के साथ रह रहा है तो निश्चित ही उसका असर बाकी सदस्यों पर पड़ता है, क्योंकि परिवार के अन्य सदस्य उसकी बीमारी से अनजान होते हैं। अपनत्व के नाते वे उसकी अनसुलझी और अंधविश्वास से जुड़ी बातों को भी मान सकते हैं।  
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बीमारी के अलावा हो सकता है तनाव 

पुलिस के रवैये से नाराज दिखीं सुजाता - फोटो : अमर उजाला
एम्स के एक वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ का कहना है कि मानसिक विकार होने के अलावा भाटिया परिवार किसी गहरे सदमे या तनाव से भी गुजर सकता है। चूंकि पड़ोसियों का कहना है कि ये परिवार हमेशा खुश रहता था, व्यवहार मधुर था। रोटी देने गया लड़का भी बताता है कि रात में सभी लोग सामान्य ही दिख रहे थे।

ऐसे में हो सकता है कि भाटिया परिवार अपने उस तनाव को जग जाहिर नहीं होने देना चाहता हो, लेकिन अंदर ही अंदर सभी को वह परेशान कर रहा हो। हालांकि ऐसी स्थिति में इन्होंने भी मनोवैज्ञानिक अंत्य परीक्षण को ही एकमात्र विकल्प बताया। उन्होंने ये भी कहा कि सुनंदा पुष्कर केस भी यह परीक्षण हुआ था। 
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