बिसाहड़ा कांड के बाद से ही सुबोध कुमार अपने व परिवार की सुरक्षा को लेकर अलर्ट रहते थे। वह परिवार को अपनी तैनाती के स्थान पर नहीं रखते थे। उनका परिवार गाजियाबाद व नोएडा के अलग-अलग स्थानों पर रहा। अभी उनकी पत्नी व दोनों बच्चे ग्रेटर नोएडा के गौड़ सिटी सोसाइटी में रहते हैं। हालांकि हिंदूवादी संगठनों की तरफ से मिल रही धमकी के बीच इनका परिवार अधिक लोगों से मेलजोल नहीं रखता था।
बहादुर अफसर थे सुबोध
लोगों का कहना है कि सुबोध कुमार शुरू से ही कानून के मुताबिक काम करते थे। किसी का दबाव न मानने के कारण वह पुलिस विभाग में चर्चा का विषय रहते थे। यही कारण था कि बिसाहड़ा कांड में उन तक दबाव था लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी और जांच के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट को खुद बयान भी दर्ज कराए थे। परिजनकहते हैं, कार्रवाई न करने का उन पर दबाव था लेकिन उन्होंने कानून के तहत की अपना फर्ज निभाया था।
घटना वही केवल परिस्थितियां बदलीं
बिसाहड़ा से लेकर स्याना में हुई घटनाओं से यह स्पष्ट है कि दोनों जगह भीड़ के हाथों हत्या की घटनाएं हुई। केवल परिस्थितियां भिन्न थीं। बिसाहड़ा में उग्र भीड़ ने गोमांस के शक में इकलाख को मार डाला था। तो स्याना में गोहत्या को लेकर प्रदर्शन कर रही उपद्रवी भीड़ ने इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह को ही मार डाला। जबकि सुबोध कुमार अपनी ड्यूटी निभाने के लिए मौके पर पहुंचे थे।
बुलंदशहर में भीड़ द्वारा स्याना थाने के इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या के बाद मंगलवार को पुलिस महकमे में दिन भर मायूसी रही। मंगलवार को एसएसपी डॉ. अजयपाल शर्मा ने जनपद केसभी पुलिसकर्मियों के एक दिन का वेतन शहीद इंस्पेक्टर के परिजनों को देने की घोषणा की। अभी नोएडा के अलावा एटा पुलिस ने भी इंस्पेक्टर के परिजनों को आर्थिक मदद की घोषणा की है।
शहीद इंस्पेक्टर सुबोध एटा जनपद के रहने वाले हैं और गौतमबुद्धनगर में भी कई वर्षों तक इनकी पोस्टिंग थी। एसएसपी ने बताया कि इस दुखद घटना के बाद जिले की पूरी पुलिस शहीद केपरिवार के साथ है। इस कारण सभी पुलिस कर्मियों ने एक दिन का वेतन उनके परिवार के लोगों को देने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि करीब 40 लाख रुपये की आर्थिक मदद गौतमबुद्घनगर पुलिस की तरफ से दी जाएगी। एसएसपी ने कहा वह हमारे परिवार के हिस्सा थे और इस संकट की घड़ी में परिजनों के साथ दुख बांटने के लिए हमलोग तैयार हैं।
पिछले दिनों नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अलावा जेवर आदि में भी गोवंश के अवशेष मिले थे। मगर पुलिस एक बार कार्रवाई करके गिरोह को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाई है। एक साल बाद ही फिर से गोहत्या के संदेह में कैमराला गांव में दो लोगों की पीट पीटकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद सूरजपुर और कासना क्षेत्र में भी कई घटनाएं हुई। तीन माह पहले नोएडा के गेझा-भंगेल व सिलारपुर में भी गोकशी हुई। जिसमें आसपास के ग्रामीणों ने नामजद कराते हुए रिपोर्ट भी दर्ज कराई। गेझा में जिस जगह गोवंश के अवशेष मिले थे, वहीं पर कसाइयों की मीट की दुकानें थीं। पुलिस ऐसे मामलों को गंभीरता से ले तो हालात नहीं बिगड़ें।