बुलंदशहर हिंसा में गोली लगने से हुई सुमित की मौत मामले में सातवें दिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है। यह रिपोर्ट सुमित के पिता की तहरीर पर दर्ज हुई है। हालांकि परिजन इसके लिए पहले दिन से ही लगे हुए थे। सुमित के पिता अमरजीत ने बताया कि उन्हें शासन से किसी भी प्रकार की सहायता अब तक नहीं मिली है।
इससे पहले हुए घटनाक्रम में जीतू फौजी की गिरफ्तारी के बाद उसके परिजन पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाने लगे हैं। जीतू की गिरफ्तारी होने के बाद रविवार को उसके माता-पिता ने कहा कि सेना ही मेरे बेटे जीतू को इंसाफ दिलाएगी, सेना पर मुझे पूरा भरोसा है। पुलिस ने तो उनके निर्दोष बेटे को फंसा दिया। जब कि पुलिस के पास इंस्पेक्टर को गोली मारने के मामले में उनके बेटे के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं है। उन्होंने सेना के उच्चाधिकारियों से न्याय दिलाने की बात कही।
ठहर गई है तीन गावों की जिंदगी
चिंगरावठी में बलवे के बाद तीन गांवों की जिंदगी ठहर सी गई है। बलवे के बाद पुलिस के खौफ से गांव छोड़ कर भागे अधिकांश पुरुष पांच दिन बाद भी अपने घर लौट कर नहीं आए हैं। घरों में सिर्फ महिलाएं और बुजुर्ग बचे हैं। ऐसे में घर से लेकर बाहर तक का काम करने में उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। कई घरों में तो पूरा परिवार ही भागा हुआ है। ऐसे में उनके पशुओं को चारा देने वाला भी कोई नहीं है।
बता दें कि तीन दिसंबर को स्याना थाना क्षेत्र के महाब गांव में कथित गोकशी के बाद चिंगरावठी चौकी पर लंबा बवाल हुआ था। स्याना कोतवाल और एक युवक की गोली लगने से मौत हो गई थी। बवाल में 27 नामजद और 60 अज्ञात आरोपियों की तलाश में पुलिस ने उसी दिन रात कई घरों में दबिश दी थी। पुलिस के खौफ से महाब, नयाबांस और चिंगरावठी गांव के अधिकांश युवा गांव छोड़ कर भाग गए।