भूतल और सीढ़ियां ढहीं, हवा में लटकी थी जान
घटना कश्मीरी गेट के कूचा मोहर खान इलाके की है। पीसीआर कॉल के जरिए पुलिस को इमारत ढहने की सूचना मिली। सूचना पाते ही बीट ऑफिसर हेड कांस्टेबल अंकुर, एसएचओ प्रशांत कुमार और अन्य पुलिसकर्मी तुरंत मौके (इमारत संख्या 3892) पर पहुंचे। पुलिस ने किसी बड़े हादसे को रोकने के लिए सबसे पहले इमारत के आसपास के इलाके की घेराबंदी की।
पूरी तरह ढह चुकी थी सीढ़ियां
जांच में पता चला कि इमारत का ग्राउंड फ्लोर (भूतल) और पहली मंजिल तक जाने वाली सीढ़ियां पूरी तरह से ढह चुकी थीं, जिससे अंदर जाने का कोई रास्ता नहीं बचा था। इमारत भी धीरे-धीरे गिर रही थी और दूसरी मंजिल पर तीन लोग फंसे हुए थे।
फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले ही पुलिस ने किया रेस्क्यू
समय की नजाकत को देखते हुए, फायर ब्रिगेड या एमसीडी की टीमों के पहुंचने का इंतजार किए बिना ही पुलिस टीम ने मोर्चा संभाल लिया। एसएचओ प्रशांत कुमार की देखरेख में एचसी अंकुर, एचसी अनुज कुमार और कांस्टेबल प्रवीण कुमार तुरंत बगल वाली इमारत में दाखिल हुए। वहां से वे क्षतिग्रस्त इमारत की छत पर पहुंचे और लकड़ी की सीढ़ियों व तख्तों की मदद से फंसे हुए लोगों तक पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।
"स्वयं से पहले सेवा" की मिसाल
उत्तरी जिला डीसीपी ने पुलिसकर्मियों के साहस की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी गेट थाने के इन समर्पित जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना 'स्वयं से पहले सेवा' के आदर्श को चरितार्थ किया और एक बड़ी जनहानि को टाल दिया। यह पूरा बचाव अभियान एसीपी (कोतवाली) शंकर बनर्जी के बेहतरीन समन्वय और डीसीपी नॉर्थ के समग्र पर्यवेक्षण में सफलतापूर्वक पूरा किया गया।