उत्तरी दिल्ली के आजाद मार्केट इलाके में शुक्रवार सुबह शीश महल गली में निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत जमींदोज हो गई। हादसे में मौके पर काम कर रहे तीन मजदूर और गली से गुजर रहे दो लोग मलबे में दब गए। बाद में स्थानीय लोगों ने मलबे में दबे दो राहगीरों को निकालकर नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। बाद में दमकल विभाग व पुलिस ने मलबे को हटाकर तीन मजदूरों को बाहर निकाला। घायलों में दो की हालत गंभीर बनी हुई है।
संकरी गली होने की वजह से जेसीबी मौके पर नहीं पहुंंच पाई, जिससे राहत कार्य में दिक्कत आई। दमकल विभाग, एनडीआरएफ की टीम और मजदूर मलबे को हटाने के काम में देर रात तक जुटे रहे। आशंका है कि घटना के समय स्कूल जा रहे कुछ बच्चे भी मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं। पुलिस ने आशंका जताई है कि निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल और अधिक वजन की वजह से हादसा हुआ है। फिलहाल पुलिस बिल्डर और ठेकेदार से पूछताछ कर जांच में जुटी है।
शुक्रवार सुबह करीब 8.30 बजे पुलिस और दमकल विभाग को आजाद मार्केट इलाके के मकान नंबर 749 के गिरने की सूचना मिली। सूचना मिलने के बाद पुलिस, एमसीडी, कैट एंबुलेंस, डीडीएमए, एनडीआरएफ, क्राइम टीम और 20 दमकलकर्मी चार गाड़ियों के साथ मौके पर पहुंच गए। तब तक स्थानीय लोग इलाके में रहने वाले अजीजुर रहमान और जलील को मलबे से घायल अवस्था में बाहर निकालकर बाड़ा हिंदूराव अस्पताल में पहुंचा चुके थे। जलील को गंभीर चोट लगी थी। इमारत गिरने के दौरान दोनों उसके सामने से निकल रहे थे।
मौके पर पहुंची पुलिस और दमकलकर्मियों को पता चला कि घटना के दौरान सात मजदूर यहां काम कर रहे थे, जिसमें तीन मजदूर मलबे में फंसे हैं। पुलिस, दमकलकर्मी और स्थानीय लोग तुरंत राहत कार्य में जुट गए और एक घंटे बाद मलबे में फंसे तीन मजदूर कांग्रेसी यादव, नीतीश और अमरदीप को बाहर निकाल लिया और बाड़ा हिंदूराव अस्पताल में भर्ती कराया। नीतीश को ज्यादा चोट है और उसकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे दूसरे अस्पताल में रेफर कर दिया। उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त सागर सिंह कलसी ने बताया कि हादसे में पांच लोग घायल हुए हैं। घायलों की मेडिकल रिपोर्ट और पीसीआर कॉल के आधार पर पुलिस ने लापरवाही का मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, पिछले दो माह से निर्माण कार्य चल रहा था। राजेंद्र नगर निवासी अजय कुमार जैन मकान मालिक हैं, बिल्डर की पहचान आजाद मार्केट निवासी मोहम्मद मुजफ्फिर के रूप में हुई है।
तंग गलियों, तारों के मकड़जाल से बचाव कार्य में दिक्कत
जहां पर यह हादसा हुआ, वहां पर गलियां काफी तंग हैं। वहां तक पहुंचने में दमकल विभाग और दूसरी एजेंसियों की टीम को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। एक तरफ जहां गलियां तंग हैं, दूसरी तरफ ऊपर बिजली के तारों का मकड़जाल फैला हुआ है। मलबा उठाने के लिए मौके तक जेसीबी नहीं पहुंच पाई जिससे मलबा हटाने के लिए मजदूरों को लगाना पड़ा। इसकी वजह से राहत कार्य में दिक्कत हुई। जिस तरह से मजदूरों की मदद से मलबा हटाने का काम चल रहा है, इससे अंदाजा है कि मलबा पूरी तरह से हटाने में दो दिन लग सकते हैं।
दिन में हो सकता था भयावह हादसा
मजदूरों ने बताया कि रात में वह मजदूर काम करते थे जो निर्माण सामग्री को इमारत में रखते थे। वह सुबह साढ़े नौ बजे तक काम करते थे। वहीं दस बजे से 40 से अधिक मजदूर निर्माण कार्य करते थे। इसके अलावा गली से काफी लोगों का आना जाना है। ऐसे में सुबह दस बजे के बाद इमारत गिरती तो हादसा भयावह होता।
हादसे पर मुख्यमंत्री ने जताया दुख
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इमारत गिरने के हादसे पर दुख जताया। उन्होंने जानकारी दी कि वह पूरा दिन जिला प्रशासन से इस घटना की जानकारी ले रहे थे। मौके पर चले राहत व बचाव कार्य पर मुख्यमंत्री ने संतुष्टि जाहिर की।
इमारत को घटिया निर्माण सामग्री से बनाया
एमसीडी के भवन निर्माण विभाग द्वारा साइट से जुटाई जानकारी के मुताबिक यह पाया गया कि इस इमारत के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया था और भवन पर निर्माण सामग्री का भारी भार जमा था, जिसके कारण इसके पिलर इसका भार नहीं सह पाए और यह ढह गई। घटना स्थल पर से मलबा हटाने के बाद ही इसके गिरने के सटीक कारण का पता लगाया जाएगा। एमसीडी के भवन रखरखाव विभाग के अधिकारियों ने पूरा दिन 10 ट्रक लगाकर साइट से मलबा हटवाया। तेजी से काम कराने के लिए भवन प्रकोष्ठ के मजदूर और ठेकेदार के मजदूरों को लगाया गया।
आर्थिक स्थिति ठीक नहीं इसलिए करते हैं मजदूरी
घटना के दौरान वहां मजदूरी करने वाले अंग्रेज यादव ने बताया कि गांव में उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और ज्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं इसलिए वह मजदूरी करने के लिए दिल्ली आए हैं। उसने बताया कि वह अपने दो भाई कांग्रेस और नीतीश के साथ आर्या नगर में रहता है। रात की पाली में ज्यादा रकम मिलने की वजह से तीनों भाई रात में काम करते थे ताकि उसके घर की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके। उसने कहा कि उसके दोनों भाई घटना में घायल हुए हैं। उनकी सरकार से मांग है कि इनका सही ढंग से इलाज हो। घायल अमरजीत बोल नहीं पा रहा है। उसके दोस्त दिलखुश ने बताया कि अमरजीत की पत्नी रेखा छह माह की गर्भवती है। गांव में ठीक ढंग से इलाज नहीं हो पाता है। अमरजीत पैसे जुटाकर अपनी पत्नी का शहर में इलाज करवाना चाहता है।