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नोएडा में निवेशकों को बिल्डर्स का नया झांसा, आगरा-लखनऊ में लो प्लॉट

Sat, 13 May 2017 10:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
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protest - फोटो : अमर उजाला
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बिल्डरों की धोखाधड़ी से परेशान शनिवार को करीब सात बिल्डर प्रोजेक्टों के कई निवेशकों ने सेक्टर-14ए स्थित एसएसपी कार्यालय पर प्रदर्शन करके ज्ञापन सौंपा। निवेशकों ने एसएसपी से बिल्डरों पर कार्रवाई की मांग की। 
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प्रदर्शन में मौजूद अंसल के सुशांत मेगापॉलिस प्रोजेक्ट के निवेशकों ने बताया कि बिल्डर निवेशकों को ग्रेटर नोएडा की जगह आगरा और लखनऊ में प्लॉट देने का झांसा दे रहा है। बोड़ाकी रेलवे स्टेशन के पास स्थित बुलंदशहर प्राधिकरण की जमीन पर स्थित इस प्रोजेक्ट को अंसल ने 2006-07 में लांच किया था। इसमें फ्लैट, विला और प्लॉट शामिल हैं। 

बिल्डर ने बताया था कि 2504 एकड़ में प्रोजेक्ट बनेगा जबकि बाद में पता लगा कि 600 एकड़ जमीन का ही अधिग्रहण किया गया है। बिल्डर ने धोखाधड़ी कर करीब 8600 निवेशकों से पैसा ले लिया और करीब 1500 एकड़ जमीन बेच दी। निवेशक विवेक आनंद ने बताया कि 10 साल हो गए 95 फीसदी पैसा दे दिया है, लेकिन फ्लैट नहीं मिला। 20 से 25 टावर बनने थे, अभी एक पर ही काम हुआ है। 
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जिन निवेशकों ने प्लॉट बुक कराया था, उन्हें यहां जमीन नहीं होने की बात कहते हुए लखनऊ और आगरा में प्लॉट देने की बात बिल्डर कह रहा है। जब उन्हें नोएडा-ग्रेटर नोएडा में नौकरी करनी है तो लखनऊ और आगरा में प्लॉट क्यों लें। 

निवेशक नसीम ने बताया कि उन्होंने अंसल के प्रोजेक्ट में प्लॉट बुक कराया था। बिल्डर ने बोड़ाकी रेलवे स्टेशन के पास के स्थान पर आगरा और लखनऊ में कब्जे की बात कही। जब आगरा प्लॉट देखने पहुंचे तो जमीन पर खेती हो रही थी।

250 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप 
सेक्टर-63 प्रोपलरिटी इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड रियल एस्टेट कंपनी पर निवेशकों ने धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। निवेशकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने एसएसपी को ज्ञापन सौंपकर निदेशक सत्येंद्र सिंह तोमर के खिलाफ  कार्रवाई की मांग करते हुए कंपनी पर 250 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। निवेशकों ने बताया कि करीब 1000 निवेशकों ने 2015 में बिल्डर को सेक्टर-62 स्थित बिजलाइफ प्रोजेक्ट में ऑफिस स्पेस और दुकान के लिए पैसे दिए थे। बिल्डर ने 2017 में प्रोजेक्ट को पूरा करने का लिखित वादा किया था। 

अभी तक प्रोजेक्ट में 2 प्रतिशत का काम भी नहीं हुआ है। एक साल से पूरा काम बंद है। बिल्डर का ऑफिस बंद है, उसकी वेबसाइट, ईमेल व टेलीफोन भी बंद है। निवेशकों ने बताया कि कुछ खरीदारों ने 2016 में वर्चुअल स्पेस के लिए पैसे लगाए थे। कई निवेशकों को सुनिश्चित रिटर्न के तौर पर चेक दिए गए थे जो बाउंस कर गए हैं। बिल्डर के निदेशक सत्येंद्र सिंह तोमर व अन्य निदेशकों ने मिलकर करीब 1000 निवेशकों को करीब 11,100 यूनिट बेची और 250 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटा ली। 

कंपनी के अन्य निदेशकों में पवन जसूजा, सौरभ पांडे, नागेंद्र प्रताप सिंह, आशीष कुमार, संदीप कौशिक, प्रशांत कुमार, अतुल विक्रम सिंह, विशाल खैरावत, अजीत कुमार, संजय जैन और मलय अग्रवाल शामिल हैं। निवेशक विनोद कुमार ने आशंका जताई है कि बिल्डर रुपये हड़प कर विदेश भागने की तैयारी में है। इस संबंध में सेक्टर-58 थाने में भी लिखित शिकायत की जा चुकी है। निवेशक अमित जयसवाल ने कहा कि बिल्डर पर कार्रवाई नहीं हुई और निवेशकों का पैसा नहीं मिला तो प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री से गुहार लगाएंगे।

100 करोड़ लेकर बिल्डर फरार
वैदिक सिटी प्रोजेक्ट के निवेशकों ने बताया कि ग्रेटर नोएडा से सटे दौलाराजपुरा गांव में प्रोजेक्ट लांच हुआ था। ओमेक्स ग्रुप की कंपनी रीवाज इंफ्राटेक प्राइवेट ने वैदिक सिटी प्रोजेक्ट को विकसित करने का जिम्मा यूपी इंफ्रा स्टेट प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दिया। 

वैदिक सिटी बायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद नसीम ने बताया कि उन्होंने आरटीआई डाली थी, जिसमें पता लगा कि बिल्डर को 43 एकड़ जमीन का आवंटन है जबकि निवेशकों को बिल्डर ने 3600 एकड़ के प्रोजेक्ट का झांसा दिया था। 300 से अधिक निवेशक हैं, जिनका करीब 100 करोड़ रुपये लेकर बिल्डर गायब है।
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