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वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए बढ़ा बजट, 460 करोड़ का प्रावधान

Fri, 01 Feb 2019 08:14 PM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली वायु प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला
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अगले पांच वर्षों में दिल्ली-एनसीआर समेत देश के 102 शहरों की वायु गुणवत्ता में सुधार करने और जल व ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए इस बार केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के बजट में 500.3 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है। 

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वहीं, पहली बार 460 करोड़ रुपये का बजट प्रस्ताव सिर्फ प्रदूषण नियंत्रण के लिए गया है, जिसका बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम (एनसीएपी) की फंडिग के लिए होगा। एनसीएपी के तहत दिल्ली और आस-पास शहरों के अलावा यूपी का बरेली, इलाहाबाद, वाराणसी और कानपुर भी शामिल हैं।   
     
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि अंतरिम बजट में पर्यावरण पर खासा ध्यान रखा गया है। खासतौर से स्वच्छ हवा, स्वच्छ नदी और स्वच्छ पेयजल के अलावा तटवर्ती इलाकों में रहने वालों के लिए नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ाने वाला है।        
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पर्यावरण के लिए 3175.72 करोड़ रुपये 
पर्यावरण, वन और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के लिए 3175.72 करोड़ रुपये के बजट का प्रस्ताव किया गया है। जबकि बीते वित्त वर्ष में मंत्रालय के लिए अनुमानित बजट 2675.42 करोड़ रुपये ही था। इस प्रकार 500.3 करोड़ रुपये की बढ़त इस बार हुई है।  

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प्रदूषण नियंत्रण के तहत इन्हें होगी फंडिग  
एनसीएपी के लिए पहली बार प्रदूषण नियंत्रण (कंट्रोल ऑफ पॉल्यूशन) को लेकर बजट में अलग से प्रावधान किया है। प्रदूषण नियंत्रण का मकसद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, प्रदूषण नियंत्रण समितियों और नेशनल स्वच्छ हवा कार्यक्रम (एनसीएपी) को फंडिंग करने के अलावा अन्य योजनाओं जैसे राष्ट्रीय जल निगरानी कार्यक्रम, राष्ट्रीय ध्वनि निगरानी नेटवर्क और अन्य सहयोगी कार्यक्रमों को भी फंड दिया जाएगा। जबकि बीते वर्ष सरकार की ओर से पराली के कारण होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए बड़ा एलान किया गया था।  

बाघ और हाथी के लिए नहीं बढ़ा बजट 
जिन मदों में बजट बढ़ाया गया है उनमें प्रदूषण नियंत्रण के बाद वानिकी और वनों के संरक्षण के लिए कुल बजट में 30 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है। बीते वित्त वर्ष (2018-19) नेशनल मिशन फॉर ग्रीन इंडिया के लिए 210 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था जबकि इस बार 240 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है। वन्य जीवों में हाथी और बाघों के लिए बजट में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। 

नदी संरक्षण के लिए बढ़ा बजट  
नदियों को संरक्षित करने के लिए इस बार बजट में 23 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इस मद में कुल 146 करोड़ रुपयेका प्रस्ताव किया गया है। जबकि बीते वित्त वर्ष में इसके लिए 123.50 करोड़ दिए गए थे। वहीं, प्राकृतिक संसाधनों और पारिस्थितिकी संरक्षण के लिए कुल बजट का प्रस्ताव 86 करोड़ है। बीते वित्त वर्ष के मुकाबले 6 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।  

एनजीटी का बजट घटा
पिछले वित्तीय वर्ष में एनजीटी के लिए 45 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था,  लेकिन इस बार तीन करोड़ घटाकर 42 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
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