प्रदूषण नियंत्रण के तहत इन्हें होगी फंडिग
एनसीएपी के लिए पहली बार प्रदूषण नियंत्रण (कंट्रोल ऑफ पॉल्यूशन) को लेकर बजट में अलग से प्रावधान किया है। प्रदूषण नियंत्रण का मकसद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, प्रदूषण नियंत्रण समितियों और नेशनल स्वच्छ हवा कार्यक्रम (एनसीएपी) को फंडिंग करने के अलावा अन्य योजनाओं जैसे राष्ट्रीय जल निगरानी कार्यक्रम, राष्ट्रीय ध्वनि निगरानी नेटवर्क और अन्य सहयोगी कार्यक्रमों को भी फंड दिया जाएगा। जबकि बीते वर्ष सरकार की ओर से पराली के कारण होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए बड़ा एलान किया गया था।
बाघ और हाथी के लिए नहीं बढ़ा बजट
जिन मदों में बजट बढ़ाया गया है उनमें प्रदूषण नियंत्रण के बाद वानिकी और वनों के संरक्षण के लिए कुल बजट में 30 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है। बीते वित्त वर्ष (2018-19) नेशनल मिशन फॉर ग्रीन इंडिया के लिए 210 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था जबकि इस बार 240 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है। वन्य जीवों में हाथी और बाघों के लिए बजट में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई।
नदी संरक्षण के लिए बढ़ा बजट
नदियों को संरक्षित करने के लिए इस बार बजट में 23 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इस मद में कुल 146 करोड़ रुपयेका प्रस्ताव किया गया है। जबकि बीते वित्त वर्ष में इसके लिए 123.50 करोड़ दिए गए थे। वहीं, प्राकृतिक संसाधनों और पारिस्थितिकी संरक्षण के लिए कुल बजट का प्रस्ताव 86 करोड़ है। बीते वित्त वर्ष के मुकाबले 6 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।
एनजीटी का बजट घटा
पिछले वित्तीय वर्ष में एनजीटी के लिए 45 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, लेकिन इस बार तीन करोड़ घटाकर 42 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।