रियल एस्टेट सेक्टर में रेरा और जीएसटी लागू होने के बाद पारदर्शिता बढ़ी है। यह कहा जा सकता है कि सेक्टर दोबारा से खड़े होने की हालत में है। ऐसे में सेक्टर को बजट 2019-20 से काफी उम्मीदें हैं। इसमें कंस्ट्रक्शन के लिए निर्माण सामग्री पर जीएसटी को कम करने के लिए पीएमएवाई के तहत फंड उपलब्ध कराने से लेकर होम लोन पर ब्याज दर घटाने और सेक्टर को इंडस्ट्री का दर्जा दिलाने जैसे मांगें शामिल हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री के ड्रीम मिशन ‘हाउसिंग फॉर आल 2022’ को पूरा करने के नजरिये से भी यह बजट काफी अहम होने वाला है।
एनबीएफसी संकट को हल करने के लिए सरकार को हस्तक्षेप करने की जरूरत है। जिसे अटकी परियोजनाओं में मदद मिलेगी। रियल एस्टेट सेक्टर को उद्योग का दर्जा देने, घर खरीदारों के लिए टैक्स में अधिक राहत और जीएसटी दरों पर बेहतर स्पष्टता जैसी नियमित मांगों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
- ध्रुव अग्रवाल, ग्रुप सीईओ, हाउसिंग डॉट कॉम
कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं जैसे सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम, होम लोन ब्याज पर छूट की सीमा में बढ़ोतरी और इंडस्ट्री स्टेटस का दर्जा को इस बजट में प्रमुखता देने की जरूरत है ताकि सेक्टर में तेजी आए और लोगों का विश्वास और अधिक बढ़ सके।
- अमित मोदी, निदेशक, एबीए कॉर्प और अध्यक्ष (इलेक्ट), क्रेडाई, पश्चिमी यूपी
टैक्स की छूट में ज्यादा सहूलियत हो, ताकि पर्सनल होम लोन में आसानी हो सके। यूनियन बजट के साथ टीडीएस हटाने की उम्मीद हैं, जिसकी किसी चल-अचल संपत्ति के ट्रांसफर के दौरान कटौती की जाती है। इस प्रकिया को आसान बनाया जाना चाहिए ।
- दीपक कपूर, डायरेक्टर, गुलशन होम्स
सेक्टर को इंडस्ट्री का दर्जा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा कंस्ट्रक्शन में लगने वाली निर्माण सामग्री जैसे सीमेंट आदि में लगने वाले जीएसटी को भी कम करने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए ताकि इसका फायदा घर खरीददारों को पहुंचाया जा सके।
- कौशल जैन, एमडी, अरिहंत ग्रुप