इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के परिचालन को प्राथमिकता देने के बीच तेल मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को कहा कि भारत वाहनों के लिए पेट्रोल और डीजल पर निर्भर रहेगा। निकट भविष्य में ईंधन की मांग को पूरा करने के लिए अपनी तेल शोधन क्षमता का 80 फीसदी तक विस्तार करने की आवश्यकता होगी।
तेल मंत्री ने ‘एनर्जी होराइजन-2019’ सम्मेलन में कहा कि ईवी प्राथमिकता में है, लेकिन ईंधन की बढ़ती जरूरतों को बीएस-6 मानक वाले पेट्रोल-डीजल, सीएनजी और जैव ईंधन के साथ ही ई-वाहन सभी को मिला-जुलाकर पूरा किया जाएगा। इस वक्त बीएस-6 ईंधन का इस्तेमाल लगभग 60 प्रतिशत एनसीआर कर रहा है।
विश्व की तीसरी सबसे बड़ी ऊर्जा उपभोक्ता (भारत) को अपनी परिवहन जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वच्छ पेट्रोल-डीजल, सीएनजी, जैव ईंधन और ई-वाहनों के संयोजन की आवश्यकता होगी।
उन्होंने कहा कि देश के पास कच्चे तेल का शोधन कर इसे पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन में बदलने की पर्याप्त क्षमता है। भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए इसे और बढ़ाने की आवश्यकता होगी। देश की घरेलू तेल शोधन क्षमता सालाना 25 करोड़ टन है।